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आपको लग रहा होगा कि ऐसा अजीब सवाल मैं क्यों पूछ रहा हूं। मगर इसका कारण है। क्या आपने कभी जांचा है कि आपका चिट्ठा इंटरनेट एक्सप्लोरर -6 पर कैसा दिखता है?

जब चिट्ठाकारी शुरू की थी तो मैं इंटरनेट एक्सप्लोरर -6 प्रयोग किया करता था। मगर बाद में फायरफॉक्स शुरू किर लिया। इंटरनेट एक्सप्लोरर - 7  के आने के बाद इसके साथ ही चिपके रहे । साथ ही फायरफॉक्स  भी रखा मगर प्रयोग नहीं किया।

 

पिछले कुछ  दिनों से मेरा कंप्यूटर परेशान कर रहा था उसे फार्मेट करना पड़ा। इस दौरान अपने चिट्ठे इंटरनेट एक्सप्लोरर -6 पर देखने का मौका मिला। इससे पता चला कि मेरे चिट्ठे इंटरनेट एक्सप्लोरर -6 पर सही नहीं दिखते । खास कर ब्लॉस्पॉट पर वे चिट्ठे जिनका टैंपलेट बदला गया है।

 

अधिकतर चिट्ठाकार  फायरफॉक्स  या इंटरनेट एक्सप्लोरर - 7 ही प्रयोग करते हैं। मगर सर्च इंजनों से आने वाले पाठकों में 75% के लगभग इंटरनेट एक्सप्लोरर -6 का ही प्रयोग करते हैं (आपने यदि स्टैटकाउंटर लगा रखा है तो आप इसे आसानी से पता कर सकते हैं कि आपके पाठक कौन सा ब्राउजर प्रयोग करते हैं)।

 

तो जब भी आप अपने चिट्ठे का टैंपलेट बदलें यह जरूर जांच लें कि नया टैंपलेट क्या सभी ब्राउजरों पर सही दिखता है, खास कर वे चिट्ठाकार जो एडसेंस का प्रयोग करते हैं क्योंकि हो सकता है कि आपकी एडसेंस यूनिट जिस स्थान पर आपको नजर आती है, आपके पाठकों को किसी और स्थान पर दिख रही हो। कहीं ऐसा तो नहीं कि आपकी साईडबार साईड पर नहीं पोस्ट के नीचे नजर आ रही हो।

 


 

pitara cnet review

 

आप सब के प्रिय हिंदी टूलबार पिटारा को Cnet के download.com पर संपादकीय रिव्यू में पांच सितारे मिले हैं। इस साइट पर किसी भी उत्पाद को दी जाने वाली यह सबसे बड़ी रेटिंग है।

यह टूलबार पिछले साल जून में इस साइट पर लिस्ट हुआ था। तभी से पिटारा इस साइट पर पॉपुलर की श्रेणी में लगातार बना रहा। इसका रिव्यू आज ही प्रकाशित हुआ। रिव्यू में लिखा है:

 

Like a host of toolbars hitting the market, this one is designed to fill a very specific niche.

Hindi Toolbar Pitara focuses on Hindi speakers and readers. This free toolbar installs to Internet Explorer, and the interface is cluttered with the obligatory search field and a variety of buttons. All text associated with the toolbar is written in Hindi. Of particular interest is a tuner for Internet radio stations broadcasting in Hindi, plus links to popular sites on popular culture topics, such as Bollywood and Indian music.

The toolbar performed well in our tests, responding quickly to clicked links. Our only complaint is the cluttered design of the toolbar itself. Anyone interested in Indian culture and Hindi-oriented sites and radio will find this Internet Explorer add-on very handy.

 

इस टूलबार को पसंद करने के लिये आप सभी का बहुत बहुत धन्यवाद।

आज्ज आखां धुरविरोधी नूं कित्थे कब्रां विचों बोल

और आज अपने चिट्ठे का आईडी पासवर्ड खोल

इक हटा था चिट्ठा नारद से, तुने लिख लिख मारे पोस्ट

आज सैंकड़ों चिट्ठे बाहर हैं, देखें तेरी ओर,

उठ दर्दमंदो के दोस्त, उठ देख अपना ब्लॉगवाणी,

जहां कुछ ही चिट्ठे छाये रहें, बाकियों की न दिखे कोई निशानी।

(हिंदी टूलबार पिटारा के चिट्ठे को ब्लॉगवाणी पर जोड़ने के लिये कई इमेल और फोन किये गये मगर न तो चिट्ठा जुड़ा और न ही  कोई जवाब मिला)

(अमृता प्रीतम से क्षमा याचना सहित)

BV

ब्लॉगवाणी पर किसी लेख पर लगे क्लिक्स की संख्या लिखी रहती है कोष्ठक में। मगर पढ़ते हुए कोष्ठक नहीं पढ़ा जाता। अब देखिये बिना कोष्ठक के पढ़ने से क्या क्या अर्थ निकल रहे हैं:

  • मैं ब्लॉग पढ़ने के पैसे लेता हूँ…सुनिये एक और भूतपूर्व रंगकर्मी का बयान 93-बार
  • विमल की चीज़ अपनी कहने पर तुले हैं प्रमोदसिंह 46-बार
  • शिवकुमार मिश्र का ब्लॉग 44-बार
  • सावधान ब्लागर्स, जेल भी हो सकती है 36-बार
  • हम तीन में मस्त, वो पांचवीं की खोज में व्यस्त 28-बार
  • ब्लागिंग आपकी फायदा किसका? 27-बार
  • दर्द का नशा भी कोई नशा है क्या ? 25-बार
  • ब्लॉगर सहायता : पूरा हिन्दी में? 25-बार
  • चिट्ठों में साँस ले रही है देवभाषा 25-बार
  • ‘मुर्ग-रम बुढ़ैला’ उर्फ एक कवितामयी रेसिपी का रहस्योदघाटन 24-बार
  • “अजांत्रिक” - मशीन से इंसान के प्रेम की कहानी 23-बार
  • सिज़ेरियन से प्रसव 20-बार
  • उदय प्रकाश की कहानी : टेपचू 19-बार
  • टिपियाने का (अजी टिप्प्न्नी करने का ) अपना मज़ा है 19-बार
  • (यह पोस्ट कल हिंदी टूलबार पिटारा के चिट्ठे पर की गयी थी मगर बार बार के अनुरोध के बाद भी पिटारा का चिट्ठा ब्लॉगवाणी पर नहीं जुड़ा है इस लिये इसे आईना पर दोबारा पोस्ट किया जा रहा है। )

    चिट्ठाजगत की नयी सेवा गिरगिट के बारे में तो सभी चिट्ठाकार जान चुके होंगे। यदि नहीं जानते तो अपको बता दें कि यह सेवा आपको किसी भी युनिकोड साइट की लिपि बदल कर पढ़ने की सुविधा देती है।

    आप अपने चिट्ठे पर इसके विजेट लगा कर दूसरी लिपियों के पाठकों को अपना चिट्ठा उनकी लिपि में ही पढ़ने की सुविधा दे सकते हैं। इसके बारे में रवि जी ने यहां लिखा है।

    अब हमने पिटारा टूलबार में इसके लिंक लगाये हैं। आप किसी भी चिट्ठे या साइट की लिपि बदल कर पढ़ना चाहते हैं तो टूल मिनू में ’लिपि बदल कर पढ़े’ पर जायें और अपनी पसंद की लिपि चुन लें।