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Archive for the ‘Fun’ Category

ये क्या हो गया …….!!

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आज टैक्नोराती को पता नहीं क्या हो गया। हर चिट्ठे का रैंक 1 ही दिखा रहा है। एक बार के लिये मेरी आंखों में कैसी चमक आयी इसका आप अंदाजा लगा ही सकते हैं। और यकीन मानिये आज की तारीख भी एक अप्रेल नहीं है। वैसे यादगार के लिये हमने तो यह स्क्रीनशॉट ले लिया है।

अनुगूँज 22: हिन्दुस्तान अमरीका बन जाए तो कैसा होगा

anugunj1.jpgभई अब हम तो कभी अमेरिका गये नहीं और अमेरिका को जितना जाना समाचारों और टी वी के जरिये। हम तो इतना जानते हैं कि अपनी 10000/- रुप्पल्ली की तनख्वाह $10000/- हो जाती। वैसे जितना मैं इस बारे में सोचता हूं उतना ही रोमांचित होता जाता हूं।

हमारे समाचार चैनल तो अभी से भारत को अमेरिका बनाने पर तुले हैं। इन्हें देखने पर लगता है कि हमारी सारी युवा पीढ़ी या तो अश्लील एम एम एस बना रही है या फिर इसी तरह के कोई घटिया काम कर रही है। चैनलों का ध्यान सैलिब्रिटीस की जेल यात्रा पर ज्यादा है और बिहार और असम में आयी बाढ़ पर कम। हम बनायें या न बनायें हमारे चैनल वाले भारत को अमेरिका बनाने पर तुले हैं। इन्ही चैनलों से घ्यान आया सोचिये  हमारे राष्ट्रपति के चुनाव अगर अमेरिकी स्टाइल में टीवी चैनलों की बहस से लड़े जाते। भूत पिशाच और आत्माओं को दिखाने वाले चैनलों को इन विषयों पर बात करने के लिये सही प्रत्याशी मिल जाते। अब यह देखने वाली बात होती कि चैनल प्रत्याशियों की बातों का अनुमोदन कर रहे होते या प्रत्याशी चैनलों की बातों का। प्रत्याशी कहते कि फलाने दिवंगत नेता की आत्मा ने मुझे कहा कि मेरे दल के सारे एमपी और एमएलए आपको ही वोट देंगे। यकीन मानिये हमारे चैनल कोई  न कोई स्टिंग ऑप्रेशन करके इसका सबूत भी ले आते। अब उस दल के सदस्य बेचारे अपनी अंतरात्मा और दल के नेता की आत्मा की आवाजों के बीच बुरी तरह कन्फ्यूज हो जाते।

हमारे पड़ोसी हमारे पड़ोसी नहीं होते। शायद घूसपैठ की समस्या नहीं होती। हां हो सकता है कोई दूसरे तरीके की समस्यायें हो जातीं। आप बीस क्या दो सौ मोस्ट वांटेड की लिस्ट भी देते तो रातों रात बंदे आपकी सेवा में भिजवा दिये जाते। वैसे मैं तो यह सोच कर ही रोमांचित हो जाता हूं कि फिर अपने मन्नू भाई मूषकर जी को उठक बैठक भी करने को कहते तो वे करते। (मजाक में कही गयी इस बात को इस तरह पढ़ें कि फिर इन दोनों की बॉडी लेंग्वेज़ कुछ अलग ही होती)

और आखिर में एक बात इस आजादी के साठ साल पूरे होने के अवसर पर अपने दिल की गहराई से कह रहा हूं कि यदि भारत अमेरिका होता तो शायद इस दुनिया में ज्यादा शांती होती और इंसानों में ज्यादा बराबरी होती।

क्या आपको भी चिट्ठाकारी का नशा हो गया है ?

1. जब आप अपने नाम की जगह दूसरों को अपने चिट्ठे का नाम बताने लगें और पते के स्थान पर URL बताने लगें।

2. जब आप सुबह सुबह उठते ही कंप्यूटर ऑन करके बैठ जायें या शौचालय में भी अपना लैपटॉप साथ ले जायें।

3. जब रु 25000/- प्रतिमाह की तन्ख्वाह से ज्यादा महत्वपूर्ण रोज के $0.08 लगने लगें।

4. जब खुद की साधुवादिता पर ही आपको हीन भावना होने लगे।

यहां भी देखें

कुछ मजेदार कार्टून


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कुछ मजेदार कार्टून

मजेदार समाचार पर मजेदार समाचारों के अलावा मजेदार कार्टून भी कभी कभी देखने को मिलते हैं। हाल ही में छपे कुछ मजेदार कार्टून आपके लिये।


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यह चिट्ठाचर्चा नहीं है फिर भी…

आज नारद पर एक बहुत ही मजेदार चीज देखने को मिली। नारद पर आयी हर पोस्ट का शीर्षक जैसे अपने पहले वाले पोस्ट के शीर्षक का ही जवाब था। यकीन न हो तो यहां देख लीजिये। मजे की बात यह है कि अधिकतर पोस्ट एक दूसरे के साथ साथ हैं।

रचनात्मकता नाम की कोई चीज़ नही है।नारद का एकाधिकार खत्म होगा! 

हमारा तुम्हारा कोई रिश्ता नहीं है - बडे़ भाई की ब्लोगर मीट

विकी पर कोई गया तो फिर लौटाnarad-1.jpgnarad-1.jpg है? – समीर लाल - तुम अकेले नहीं

स्वर्ग मे बाथरूम नहीं….तॊलिया,इजिचेअर ऒर वेटिंग-रूम

यादोंके झरोखों से…गोत्र को गाली देनेवालों, सुनो

नक्सलवाद को समस्या नहीं मानें - बोए पेड बबूल का

नमक खाओ तो सेंधा नमक खाओ - भूत और कामुकता के बीच विज्ञापन

नए और फ्लॉप लेखक हिट्स से विचलित न हौं - भूख का इलाज

गोत्र का स्त्रोत - अंधेरे में झांकती आँखें

ईर्ष्या - आज का विचार

मेरा एक गीत सूनें - पहला नशा ,पहला खुमार

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अन्य प्रविष्टियां

हमहूं छाप दिये अखबार

गुलजार साहब का ‘झूम बराबर झूम’ और ‘टिकट टू हॉलिवूड’

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