पूजनीय  बड़े भैया,
प्रणाम,

 

आज फिर से एक बार आपको खत लिख रहे हैं।   हम सुने  कि आपहूं अपना बिलाग शुरू किये हैं। हमका बड़ी खुशी हुई।

हम आपकी आज तक ऐको फिलम नहीं छोड़े हैं। टेलीबिजन पर सारे इंटरब्यू देखे हैं। पर सब हिंदी में। आप हमार उत्तर परदेस में जन्मे। हिंदी के संस्कार मिले। हिंदी में सारी जिंदगी काम किया। “कौन बनेगा करोड़पति” में जब आप हिंदी बोलते तो हम जैसन कितने ही हिंदी बोलने वालों का सीना फूल जाता।

ईश्बर की किरपा से पिछले दुई साल से हमऊं बिलाग पढ़त हैं। हिंदी में लिखे बिलाग ही पढ़त हैं। ऊ का है ना के हमका अंग्रेजी बांचनी तो आती नाही। आप भी यदि हिंदी में लिखें तो हम जैइसे कितने ही लोग पढ़ पायेंगे। हम देखे हैं कि आप बाबूजी की दुई लाईन हिंदी में लिखे हैं।

AB

काहे नहीं पूरा बिलाग ही हिंदी में लिखते?

रामखिलावन
गंगा किनारे के एक गांव से

 

 

 

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8 Responses to “हिंदी में लिखिये ना बड़े भैया”  

  1. सही लिखा है

  2. :) तुम भी न रामखिलावान!! कित्ती बेकार जिद्द करते हो. हिन्दी में लिखने से ४०० कमेंट किससे करवाओगे. एक ठो तो चलो उड़न तश्तरी का मिल जायेगा बकिया??? टि आर पी कौन चीज है, बुझाता है कि नाहि??

  3. हमेशा की तरह.. समीर लाल सही कह रहे हैं.. हिंदी में बेचेंगे.. मगर लिखना तो अंग्रेजी में ही पड़ेगा, महाराज..

  4. समझवे नहीं करता ई राम खेलावन. वैसे हिन्दी में लिखा पढने में आसानी होती है.

  5. हम तो यही देखकर चकरा गये कि चचा हिन्दी में चार अक्षर लिखे हैं. एकर मतलब बिगअड्डा में यूनिकोड काम करत है. चचा को इतना पता है कि हिन्दी में ब्लाग लिखि सकत है तो कौनौ दिन तोहार ब्लाग पढ़ेंगे जरूर जगदीश भाई. तनिक सावधान रहिहौ.

  6. मैने तो हिन्दी मे कमेंट दे डाला है उन पर अब देखता हूं की पढ पाते हैं की नही

  7. 7 प्रकाश कुमार

    हिन्‍दुस्‍तान में रहकर हिन्‍दी से परहेज करना, मेरे ख्‍याल से उनके द्वारा अपने पिता अपमान करने जैसा है, जो एक बहुत प्रसिद्ध कवि रहे हैं।
    हालांकि उनका ब्‍लॉग काफी पसंद किया जा रहा है, लेकिन उन प्रशंसकों को निराशा जरूर होती है, जिन्‍हें अंग्रेजी भाषा का ज्ञान नहीं है।

    रामखिलावन की बातों से हम भी सहमत है, लेकिन ‘बड़े मिया’ को अपना ब्‍लॉग हिन्‍दी में ही नहीं, अन्‍य भारतीय भाषाओं में भी अनुवादित करना चाहिये।

    प्रकाश कुमार


  1. 1 हिंदी ना लिखिये लार्ज भैया « आईना

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