आज्ज आखां धुरविरोधी नूं कित्थे कब्रां विचों बोल

और आज अपने चिट्ठे का आईडी पासवर्ड खोल

इक हटा था चिट्ठा नारद से, तुने लिख लिख मारे पोस्ट

आज सैंकड़ों चिट्ठे बाहर हैं, देखें तेरी ओर,

उठ दर्दमंदो के दोस्त, उठ देख अपना ब्लॉगवाणी,

जहां कुछ ही चिट्ठे छाये रहें, बाकियों की न दिखे कोई निशानी।

(हिंदी टूलबार पिटारा के चिट्ठे को ब्लॉगवाणी पर जोड़ने के लिये कई इमेल और फोन किये गये मगर न तो चिट्ठा जुड़ा और न ही  कोई जवाब मिला)

(अमृता प्रीतम से क्षमा याचना सहित)


2 Responses to “धुरविरोधी से एक अपील”  

  1. 1 दीपक भारतदीप

    दिलचस्प!
    दीपक भारतदीप

  2. 2 Jitu

    धुरविरोधी जी भले ही हमारे बीच् ना हो, उनके विचार्, उनकी हर्(बात् बेबात्) विरोध् करने की आदत्, हम् सभी के बीच् मे रहेगी, जहां भी विवाद होगा धुरविरोधी का नाम् परोक्ष् रुप् से लिया जाएगा। धुरविरोधी जी आज जहां कही भी हो ईश्वर् उनकी आत्मा को शान्ति दे, और् हम् सभी को बेवजह् विरोध् करने का माद्दा और् शक्ति प्रदान् करे।

    आप् सभी को होली मुबारक्।

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