ब्लॉगवाणी पर किसी लेख पर लगे क्लिक्स की संख्या लिखी रहती है कोष्ठक में। मगर पढ़ते हुए कोष्ठक नहीं पढ़ा जाता। अब देखिये बिना कोष्ठक के पढ़ने से क्या क्या अर्थ निकल रहे हैं:
मैं ब्लॉग पढ़ने के पैसे लेता हूँ…सुनिये एक और भूतपूर्व रंगकर्मी का बयान 93-बार
विमल की चीज़ अपनी कहने पर तुले हैं प्रमोदसिंह 46-बार
शिवकुमार मिश्र का ब्लॉग 44-बार
सावधान ब्लागर्स, जेल भी हो सकती है 36-बार
हम तीन में मस्त, वो पांचवीं की खोज में व्यस्त 28-बार
ब्लागिंग आपकी फायदा किसका? 27-बार
दर्द का नशा भी कोई नशा है क्या ? 25-बार
ब्लॉगर सहायता : पूरा हिन्दी में? 25-बार
चिट्ठों में साँस ले रही है देवभाषा 25-बार
‘मुर्ग-रम बुढ़ैला’ उर्फ एक कवितामयी रेसिपी का रहस्योदघाटन 24-बार
“अजांत्रिक” - मशीन से इंसान के प्रेम की कहानी 23-बार
सिज़ेरियन से प्रसव 20-बार
उदय प्रकाश की कहानी : टेपचू 19-बार
टिपियाने का (अजी टिप्प्न्नी करने का ) अपना मज़ा है 19-बार
मजेदार चीज खोज कर लाये हैं आप

एक एक लाईन से अलग अलग मजेदार अर्थ निकल रहा है .. जैसे सिज़ेरियन से प्रसव 20-बार !!
is bat ki trf to mera dhyan hi nhi gya tha.achchhi khoj hai aapki