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	<title>Comments on: इकनॉमिक टाइम्स अब हिंदी में भी</title>
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	<description>आईना देख कर तस्सली हुई, हमको इस घर में जानता है कोई..........! - गुलजार</description>
	<pubDate>Tue, 13 May 2008 21:13:35 +0000</pubDate>
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		<title>By: sanjay patel</title>
		<link>http://aaina2.wordpress.com/2008/02/19/economics-times-in-hindi/#comment-2937</link>
		<dc:creator>sanjay patel</dc:creator>
		<pubDate>Sun, 02 Mar 2008 13:17:21 +0000</pubDate>
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		<description>हिन्दी में इकाँनामिक टाइम्स का आना और वह भी एक अंग्रेज़ी समाचार पत्र समूह से वाक़ई हिन्दी की जीत का जश्न मनाने का प्रसंग है. कितना ही कोई कहे कि अंग्रेज़ी का साम्राज्य बढ़ रहा है हिन्दी के वजूद को ख़ारिज नहीं किया जा सकता.एडवरटाइज़िग अभियानों में भी अब हिन्दी का दमख़म बढ़ रहा है....लेकिन इतना भी जान लें इकॉनॉमिक टाइम्स जैसे अख़बार हिन्दी की सेवा के लिये नहीं सरक्यूलेशन की प्रतिस्पर्धा और अपनी कमाई के लिये बाज़ार में उतरे हैं ...हम हिन्दी वालों को ज़्यादा खु़श होने की ज़रूरत नहीं है....ये एक नया व्यापारिक फ़लसफ़ा है जनाब.</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>हिन्दी में इकाँनामिक टाइम्स का आना और वह भी एक अंग्रेज़ी समाचार पत्र समूह से वाक़ई हिन्दी की जीत का जश्न मनाने का प्रसंग है. कितना ही कोई कहे कि अंग्रेज़ी का साम्राज्य बढ़ रहा है हिन्दी के वजूद को ख़ारिज नहीं किया जा सकता.एडवरटाइज़िग अभियानों में भी अब हिन्दी का दमख़म बढ़ रहा है&#8230;.लेकिन इतना भी जान लें इकॉनॉमिक टाइम्स जैसे अख़बार हिन्दी की सेवा के लिये नहीं सरक्यूलेशन की प्रतिस्पर्धा और अपनी कमाई के लिये बाज़ार में उतरे हैं &#8230;हम हिन्दी वालों को ज़्यादा खु़श होने की ज़रूरत नहीं है&#8230;.ये एक नया व्यापारिक फ़लसफ़ा है जनाब.</p>
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		<title>By: महामंत्री-तस्लीम</title>
		<link>http://aaina2.wordpress.com/2008/02/19/economics-times-in-hindi/#comment-2936</link>
		<dc:creator>महामंत्री-तस्लीम</dc:creator>
		<pubDate>Fri, 29 Feb 2008 05:16:53 +0000</pubDate>
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		<description>बहुत अच्छी सूचना है, आप सबको मुबारक हो।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>बहुत अच्छी सूचना है, आप सबको मुबारक हो।</p>
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		<title>By: शरद कुमार मिश्रा "स्नेही"</title>
		<link>http://aaina2.wordpress.com/2008/02/19/economics-times-in-hindi/#comment-2935</link>
		<dc:creator>शरद कुमार मिश्रा "स्नेही"</dc:creator>
		<pubDate>Sun, 24 Feb 2008 13:33:53 +0000</pubDate>
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		<description>कहते है कि मंजिले रोकने से भी नही रोकी जाती , अगर हौसला बुलंद हो तो उसे लंगडा भी पा लेता है . यही कुछ दशा हमारे देश कि अर्थ ब्यवस्था कि भी है. आज ८.५ % का विकाश डर और कुछ बुनियादी क्षेत्रो मे जैसे आईटी मे हमारे देश के नौजवानों ने पूरी दुनिया मे भारत का जो झंडा बुलंद किया है उसपर क्यो न भारत वासी को नाज हो . लेकिन अगर वही बदती महागाई और बेरोजगारी देखे तो शायेद हम शर्म से पानी पानी हो जाते है.

कहने के लिए बहुत कुछ है जैसे कि आज भी बहुत किसान आत्महत्या कर रहे है .
नक्सलवाद चरम पर है.क्षेत्रवाद का विष पूरे भारत को कमजोर कर रहा है. आदि आदि
क्या नयी शःस्त्रब्दी के भारत को इनसे कभी मुक्ति मिलेगी</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>कहते है कि मंजिले रोकने से भी नही रोकी जाती , अगर हौसला बुलंद हो तो उसे लंगडा भी पा लेता है . यही कुछ दशा हमारे देश कि अर्थ ब्यवस्था कि भी है. आज ८.५ % का विकाश डर और कुछ बुनियादी क्षेत्रो मे जैसे आईटी मे हमारे देश के नौजवानों ने पूरी दुनिया मे भारत का जो झंडा बुलंद किया है उसपर क्यो न भारत वासी को नाज हो . लेकिन अगर वही बदती महागाई और बेरोजगारी देखे तो शायेद हम शर्म से पानी पानी हो जाते है.</p>
<p>कहने के लिए बहुत कुछ है जैसे कि आज भी बहुत किसान आत्महत्या कर रहे है .<br />
नक्सलवाद चरम पर है.क्षेत्रवाद का विष पूरे भारत को कमजोर कर रहा है. आदि आदि<br />
क्या नयी शःस्त्रब्दी के भारत को इनसे कभी मुक्ति मिलेगी</p>
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		<title>By: शरद कुमार मिश्रा "स्नेही"</title>
		<link>http://aaina2.wordpress.com/2008/02/19/economics-times-in-hindi/#comment-2934</link>
		<dc:creator>शरद कुमार मिश्रा "स्नेही"</dc:creator>
		<pubDate>Sun, 24 Feb 2008 13:32:33 +0000</pubDate>
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		<description>कहते है कि मंजिले रोकने से भी नही रोकी जाती , अगर हौसला बुलंद हो तो उसे लंगडा भी पा लेता है . यही कुछ दशा हमारे देश कि अर्थ ब्यवस्था कि भी है. आज ८.५ % का विकाश डर और कुछ बुनियादी क्षेत्रो मे जैसे आईटी मे हमारे देश के नौजवानों ने पूरी दुनिया मे भारत का जो झंडा बुलंद किया है उसपर क्यो न भारत वासी को नाज हो . लेकिन अगर वही बदती महागाई और बेरोजगारी देखे तो शयेद हम शर्म से पानी पानी हो जाते है.कहने के लिए बहुत कुछ है जैसे कि आज भी बहुत किसान आत्महत्या कर रहे है .
नक्सलवाद चरम पर है.क्षेत्रवाद का विष पूरे भारत को कमजोर कर रहा है. आदि आदि
क्या नयी शःस्त्रब्दी के भारत को इनसे कभी मुक्ति मिलेगी</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>कहते है कि मंजिले रोकने से भी नही रोकी जाती , अगर हौसला बुलंद हो तो उसे लंगडा भी पा लेता है . यही कुछ दशा हमारे देश कि अर्थ ब्यवस्था कि भी है. आज ८.५ % का विकाश डर और कुछ बुनियादी क्षेत्रो मे जैसे आईटी मे हमारे देश के नौजवानों ने पूरी दुनिया मे भारत का जो झंडा बुलंद किया है उसपर क्यो न भारत वासी को नाज हो . लेकिन अगर वही बदती महागाई और बेरोजगारी देखे तो शयेद हम शर्म से पानी पानी हो जाते है.कहने के लिए बहुत कुछ है जैसे कि आज भी बहुत किसान आत्महत्या कर रहे है .<br />
नक्सलवाद चरम पर है.क्षेत्रवाद का विष पूरे भारत को कमजोर कर रहा है. आदि आदि<br />
क्या नयी शःस्त्रब्दी के भारत को इनसे कभी मुक्ति मिलेगी</p>
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		<title>By: जीतू</title>
		<link>http://aaina2.wordpress.com/2008/02/19/economics-times-in-hindi/#comment-2929</link>
		<dc:creator>जीतू</dc:creator>
		<pubDate>Tue, 19 Feb 2008 11:11:50 +0000</pubDate>
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		<description>अच्छी खबर।
अब व्यापर सम्बंधी ब्लॉग लिखने वाले सभी लोग ध्यान से जुट जाओ, कंटेन्ट के लिए ऑफ़र आने ही वाले है।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>अच्छी खबर।<br />
अब व्यापर सम्बंधी ब्लॉग लिखने वाले सभी लोग ध्यान से जुट जाओ, कंटेन्ट के लिए ऑफ़र आने ही वाले है।</p>
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		<title>By: Anunad Singh</title>
		<link>http://aaina2.wordpress.com/2008/02/19/economics-times-in-hindi/#comment-2928</link>
		<dc:creator>Anunad Singh</dc:creator>
		<pubDate>Tue, 19 Feb 2008 06:58:56 +0000</pubDate>
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		<description>हिन्दी के लिये गौरव की बात है। आम जनता की भाषा में आर्थिक समाचार आने से बहुत जनता को भी बहुत फायदे होंगे। लोगों को अतिरिक्त बिकल्प मिलेगा - फालतू के समाचारों को पढ़ने से मुक्ति मिलेगी।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>हिन्दी के लिये गौरव की बात है। आम जनता की भाषा में आर्थिक समाचार आने से बहुत जनता को भी बहुत फायदे होंगे। लोगों को अतिरिक्त बिकल्प मिलेगा - फालतू के समाचारों को पढ़ने से मुक्ति मिलेगी।</p>
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		<title>By: संजय बेंगाणी</title>
		<link>http://aaina2.wordpress.com/2008/02/19/economics-times-in-hindi/#comment-2927</link>
		<dc:creator>संजय बेंगाणी</dc:creator>
		<pubDate>Tue, 19 Feb 2008 05:50:37 +0000</pubDate>
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		<description>इस तरह आर्थिक मामलो की हिन्दी साइटो की बाड़ आने वाली है.</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>इस तरह आर्थिक मामलो की हिन्दी साइटो की बाड़ आने वाली है.</p>
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