मैंने नहीं किया ब्लॉगवाणी पर डिस्ट्रिब्यूटिड डिनायल ऑफ सर्विस अटैक
ब्लॉगवाणी ने अपने चिट्ठे पर एक पोस्ट लिख कर मुझ पर सार्वजनिक तौर पर आरोप लगाया है कि मैंने अपने टूलबार पिटारा के द्वारा ब्लॉगवाणी पर डिस्ट्रिब्यूटिड डिनायल ऑफ सर्विस अटैक किया है। अब यदि सार्वजनिक रूप से यह आरोप लगाया गया है तो मुझे इसका जवाब भी सार्वजनिक रूप से देना पड़ रहा है।
यह distributed denial of service attack (DDoS) क्या होता है अपन को आज से पहले नहीं पता था और इसके बारे में खोजने पर विकिपीडिया पर यह लिंक मिला।
वैसे अपनी पोस्ट में सिरिल ने भी लिखा है :
…….जिन्हें DDOS (Distributed Denial of Service) Attack कहते हैं. सर्वर बिठाने के इस तरीके में बहुत सारे कमप्युटरों से किसी वेबसाइट को लगातार पिंग किया जाता है, या उसे पेज लोड रिक्वेस्ट भेजी जाती हैं. इन हजारों-लाखों पिंगो की वजह से सर्वर अपने लक्षित पाठकों की रिक्वेस्ट प्रोसेस नहीं कर पाता. वो धीमा हो सकता है, यहां तक की वेबसाइट अस्थायी रूप से बंद भी हो सकती है. dDos सर्वर को ओवरलोड कर मारने का तरीका है. मतलब जो जानवर चालीस किलो वजन ले जाता है, उस पर 400 किलो लाद दो.हमने ब्लागवाणी को एक बेहद मजबूत सर्वर पर डाला है, इसलिये वो सब कुछ बिना शिकायत झेल रहा था.ऐसा पिटारा टूलबार की वजह से हो रहा था
बहुत सारे कंप्यूटरों से हजारों लाखों पिंग भेज किसी सर्वर को मार डालने की क्षमता और तकनीक की जानकारी यदि मुझमें होती तो शायद कोई बड़ी सोफ्टवेयर कंपनी अपने को मोटी तन्ख्वाह पर रख लेती।
तकनीक से पैदल मैं एक साधारण हिंदी चिट्ठाकार हूं जो अपने कॉम्पेक V2000 पर काम करता है। बहुत सारे तो क्या मेरे पास इसके अलावा कोई दूसरा कंप्यूटर नहीं है।
मेरा अपना कोई सर्वर नहीं है। यहां तक कि कोई दो चार सौ रुपये वाला डोमेन भी नहीं है। मेरे सारे चिट्ठे ब्लॉगर या वर्डप्रैस डॉट कॉम पर ही हैं।
हिंदी टूलबार पिटारा भी इंटरनेट पर ही होस्ट है और उसी तरह किसी भी एग्रीगेटर की फीड को पढ़ता है जिस प्रकार ये एग्रिगेटर हमारे चिट्ठे की फीड को पढ़ते हैं।
पिटारा टूलबार के अब तक चार हजार से ज्यादा डाउनलोड हो चुके हैं और इसके प्रयोगकर्ता दुनियाभर में फैले हैं। ये प्रयोगकर्ता जब भी टूलबार पर क्लिक करते हैं, टूलबार फीड को ताजा करता है, इसे dDos अटैक कहना हास्यास्पद ही कहा जायेगा।
यहां मैं यह भी स्पष्ट कर दूं कि ब्लॉगवाणी का लिंक और फीड बिल्कुल उसी तरह पिटारा में लगे थे जिस प्रकार नारद और चिट्ठाजगत के लिंक और फीड लगे हैं। प्रयोगकर्ता स्वंय से केवल चिट्ठाजगत को ही पिंग कर सकते हैं और किसी एग्रीगेटर के लिये यह सुविधा पिटारा में कभी नहीं जोड़ी गयी थी। इस तर्क से तो मैं नारद, चिट्ठाजगत और अन्य सभी साईट्स जिन के लिंक पिटारा में लगे हैं, पर dDos अटैक कर रहा हूं।
अंत में मुझे यही कहना है कि यह आरोप मनघढ़ंत, झूठे और दुर्भावना में आकर लगाये गये हैं।


हमने तो सुना था की आपको पिटारा से ब्लॉगवाणी हटा लेने को कहा गया था और आपने हटा लिया था. फिर ऐसा क्यों?
जी हां, संजय भाई, मैंने ब्लॉगवाणी का लिंक और फीड हटा दिये थे। अब यह पोस्ट आई है तो इसका जवाब देना जरूरी हो गया था।
कोई शातिर बहुत ही सुनियोजित तरीके से यह काम कर रहा है। ब्लॉगवाणी के लॉग, जो कहानी कह रहे है, इससे जाहिर है कि किसी कम्प्यूटर प्रोग्राम द्वारा यह काम हो रहा है। नारद पर भी कई बार DOS and DDOS अटैक हुए थे, यह सम्भव है कि किसी एक ही बन्दे का काम हो, जो हिन्दी की सभी साइटों पर अटैक कर रहा हो।
एक गलतफहमी शायद ब्लॉगवाणी को पहले भी हुई थी, जब उन्होने मेरा आईपी अपने यहाँ बैन कर दिया था, मै जब भी अपने आईपी से ब्लॉगवाणी को एक्सैस करता था तो कभी भी ब्लॉगवाणी नही खुलता था। मैने एक बार इमेल कर उनको बताया भी और शुकुल के द्वारा मैसेज भी भिजवाया, लेकिन कोई नतीजा नही निकला। इसलिए मैने ब्लॉगवाणी पर जाना ही बन्द कर दिया, अभी कल मैने देखा तो मेरे यहाँ से ब्लॉगवाणी खुलने लगा है। खैर सारी कहानी का लब्बोलुबाव ये है कि महीने मे एक बार आपसे मे मिलबैठ कर अपने मनमुटाव दूर कर लीजिए, (आप लोग तो एक ही शहर मे हो), इस तरह सार्वजनिक रुप से आरोप प्रत्यारोपण मे दोनो पक्षो की ही भद्द पिटती है।
ब्लॉगवाणी वालों से विनम्र निवेदन है कि बिना सबूत के किसी पर भी इल्जाम मत लगाएं, वैसे भी जगदीश भाटिया तकनीकी रुप से इतने सक्षम नही है कि वो कोई स्क्रिप्ट लिख सकें। फिर भी मै दोनो पक्षो ये यही निवेदन करूंगा कि आपस मे फोन पर बात करके मसले को यही खत्म करें और दोनो पक्ष अपनी अपनी पोस्ट वापस लें।