बदलाव की हवायें किस तरह इंडिया और भारत को एक दूसरे के करीब ला रही हैं इसका एक उदाहरण देखने को मिला है।

इकॉनॉमिक्स टाइम्स हर साल अपने अखबार के साथ बांटने के लिये एक पत्रिका निकालता है ET500  जिसमें उस साल की 500 टॉप कंपनियों से परिचय करवाया जाता है और आर्थिक बदलावों की झांकी भी पेश की जाती है। इस साल के अंक में जो कि कल यानि 30 अक्टूबर को वितरित किया जायेगा इस पत्रिका की थीम है Winds of Change यानि बदलाव की हवायें।

कैसा बदलाव आ रहा है यह आपको यहां इस पत्रिका का कवर देख कर ही पता चल जायेगा


7 Responses to “बदलाव की हवायें हिंदी की ओर”  

  1. 1 sanjay bengani

    नजर तो आ रहा है.

  2. 2 gopal verma

    piche se hi sahi, Hindi aage bhadh rahi hai.

  3. 3 Anunad Singh

    शुभ समाचार है।

  4. 4 श्रीश शर्मा

    हम्म चलो शुरुआत तो हुई। :)

  5. 5 kakesh

    चलिये जान लिया कैसा ये बदलाव है.

  6. 6 हर्षवर्धन

    शुम कुरु

  7. 7 अरविद कुमार

    आप ने ठीक तरफ़ ध्यान दिलाया है, और अच्छा उदाहरण दिया है…

    बदलती दुनिया में भारत न बदले तो अजीबहोता… लेकिन यह बदलाव उन्हें नहीं भा रहा जो संस्कृति को ख़तरे के नाम पर अपने आप को म्यूज़ियम पीस बनाए रखने पर तुले हैं… नौजवान पीढ़ी कहाँसुनने वाली है… इन्हीं लोगों में से कितनों ने अपने बुज़ुर्गों की सुनी थी?

    मैं शब्दों के संसार में साठ से ऊपर साल से जुड़ा हूँ… दुनिया के कई देसों में गया हूँ… भारत का, यूरोप का, विश्व का इतिहास पढ़ा है और समझा है कि जब महान उन्नति के काल आते हैं, तो अपने साथ जातियों, समाजों और संस्कृतियों में तेज़ी से बदलाव लाते हैं, लोगों को जोड़ते हैं, एक दूसरे से प्रभावित होने की प्रक्रिया को तेज़ करते हैं…

    हम और देश इसी में से गुज़र रहे हैं.

    कठमुल्ले पुराने राग अलापते रहेंगे… फ़्यूज़न हो रहा है, हो कर रहेगा…

    अरविंद

    samantarkosh@gmail.com

Leave a Reply