Home > इंटेरनेट, काम की बात, हिंदी, Blog, Blog Promotion, Hindi > आप को पाठक और डॉलर दोनो मिल सकते हैं इससे

आप को पाठक और डॉलर दोनो मिल सकते हैं इससे

क्या जमाना आ गया है। डॉलर का मुकाबला प्याज से होने लगा है। वैसे भी अब एक  किलो प्याज की कीमत एक डॉलर के बराबर पहुंच रही है। अब यह प्याज की उन्नति है या डॉलर की अवनति  यह तो आप ही फैसला कीजिये। खुशी की बात है कि हमारे चिट्ठाकार अब एडसेंस की आय से घर के लिये प्याज खरीदने की बात कर रहे हैं।

रवि जी ने अपने लेखों में फीड के बारे में समझाया और फिर ट्रांसलिट्रेशन के बारे में भी। भोमियो का ट्रांसलिट्रेसन वाकई कमाल की चीज है तथा इस के बारे में कई चिट्ठाकार पहले भी लिख चुके हैं।

हिंदी चिट्ठाकार अपने चिट्ठों से प्याज तो क्या प्याज का छिलका भी नहीं कमा पाते तो उसका कारण है। इस बारे में मैंने पहले भी लिखा है कि अधिकतर चिट्ठाकार केवल चिट्ठाकारिता में चल रही बहसों और चिट्ठाकारों के बारे में ही लिखते हैं। न भी लिखें तो भी दिमाग में कहीं पाठक के रूप में चिट्ठाकार ही होते हैं। होता भी यही है कि आपने कोई नयी पोस्ट की तो एग्रिगेटरों से दो सौ – ढाई सौ पेजलोड्स हो गये और अगले दिन से घटते घटते पचास साठ रह गये फिर आपने पोस्ट लिखी तो पाठक आये और फिर खत्म। एक किलो प्याज के लिये पूरा एक महीने का इंतजार।

रवि जी के चिट्ठे की फीड के एक सौ पचास से भी अधिक ग्राहक हैं। अपने श्रीश शर्मा यानि कि ईपंडित की फीड के भी पचहतर ग्राहक हैं। मजेदार समाचार की फीड के पचास ग्राहक हैं। अब जब भी इन चिट्ठों पर कुछ भी लिखा जाता है वह यह सोच कर ही लिखा जाता है कि हम जो लिखने वाले हैं वह जिन लोगों ने इस फीड को सब्सक्राइब कर रखा है  उनके लिये यह लेख  कितने महत्व का है। हो सकता है कि वे लोग हिंदी चिट्ठा संसार के बारे में इतना न जानते हों। इनमें से अधिकतर फीड ग्राहक इन फीड्स को अपने किसी फीड रीडर पर ही पढ़ते हैं या इसे इमेल से प्राप्त करते हैं। वे इन्हे इन चिट्ठों पर आकर नहीं पढ़ते।

तो क्या इन चिट्ठाकारों का घाटा है कि पाठक तो हमारे चिट्ठे पर आया ही नहीं? उसने हमारी ऐड पर तो क्लिक किया ही नहीं? नहीं। इन चिट्ठाकारों ने अपने इन ग्राहकों को अपना नियमित पाठक बना लिया है। अन्यथा ये लोग एक बार इन चिट्ठों पर आये थे तो हो सकता है वापिस जा कर कभी भी न आते। जब ये लोग इन चिट्ठों पर आये तो इन्हें यहां की सामग्री अपने पढ़ने लायक लगी तो इन्होंने इन चिट्ठों का ग्राहक बनना स्वीकार किया। अब यह ग्राहक हो सकता है कि यदा कदा इन चिट्ठों पर भी आये। यदि वह पाठक इन चिट्ठों का ग्राहक न बनता तो शायद ही कभी वापिस आता। इस तरह से देखा जाये तो अपने फीड को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाना घाटे का नहीं फायदे का सौदा ही हो सकता है।जब हम फीडबर्नर को अपने चिट्ठे की फीड देते हैं तो हमारे लिये फीडबर्नर ग्राहक बनाता है। मैं कितने ही चिट्ठे गूगल रीडर पर पढ़ता हूं। इसका मतलब यह हो गया कि गूगल रीडर ने या फीडबर्नर ने चिट्ठाकार के कापीराइट का हक मार लिया? कुछ लोग तो आपकी फीड को ऑफलाइन डाउनलोड करके पढ़ते हैं।

गूगल रीडर पर पढ़ते हैं चिट्ठे

अब ट्रांसलिटरेशन की बात। हम लोगों ने अपने चिट्ठों पर भोमियो का कोड लगा रखा है। बहुत अच्छी चीज है। इसे सभी चिट्ठाकारों ने हाथों हाथ लिया। इससे हमें वे पाठक भी मिले जो अन्यथा नहीं मिलते। रवि जी ने मेरे पंजाबी चिट्ठे का भी उदाहरण दिया।

अब यदि चिट्ठाजगत हमारे लेख को रोमन में बदल कर अपने ही साइट पर दिखा रहा है तो इससे हमारे नैचरल पाठक तो कम नहीं कर रहा। वो हमारी फीड को अधिक लोगों तक पहुंचा रहा है जो कि अन्यथा न तो चिट्ठाजगत पर आते और न ही हमारे चिट्ठे पर। चिट्ठाजगत फीड्बर्नर की तरह हमारे लिये नये पाठक क्रियेट कर रहा है। अब यह नया पाठक जब यह जान लेगा कि इसी तरह की ट्रांसलिटरेशन सुविधा भोमियो के जरिये हमारे अपने चिट्ठे पर भी उपलब्ध है तो वहां भी आयेगा ही। और यदि वह पाठक देवनागरी पढ़ सकता होगा तो जरूर हमारे ही चिट्ठे पर आयेगा क्योंकि  रोमन पढ़ना सुविधाजनक नहीं होता।

एक बात और। हमारे देश में जितने इंटरनेट कनेक्शन हैं उससे कई कई गुणा ज्यादा ऐसे मोबाइल फोन हैं जिन पर इंटेरनेट चलता है। मोबाइल की शक्ति को गूगल भी पहचान रहा है। अधिकतर मोबाइल फोन्स पर देवनागरी नहीं पढ़ी जा सकती। हालांकि मेरे नये मोबाइल में देवनागरी पढ़ी जा सकती है मगर उन करोड़ों माबाइल धारकों के बारें सोचिये जिनके मोबाइल पर देवानागरी नहीं पढ़ी जा सकती। ये करोड़ों मोबाइल धारक बड़े शहरों में शाम को जब बस या ट्रेन से घर जाते हैं तो अपने मोबाइल पर ही रास्ते का लंबा समय बिताते हैं। उसी तरह छोटे शहरों में भी शाम को लोग घर आते हैं और बिजली न होने पर मोबाइल पर ही समय बिताते हैं। रोमन एग्रिगेटर इन लोगों को भी अपनी और खींच सकता है। चिट्ठाजगत इससे भी एक कदम आगे जा कर आपके चिट्ठे के लिये रोमन फीड भी बना सकता है। अब सोचिये उन करोड़ों  गैर हिंदी भाषियों के बारे में जो कि हिंदी को समझते हैं पर पढ़ नहीं सकते अब वे भी हमारे चिट्ठों की फीड के ग्राहक बन सकेंगे।

फीड में विज्ञापन

मैं तो यही सुझाव दूंगा कि अपनी फीड को बंद करने के बजाये अधिक से अधिक फीड ग्राहक बनायें और अपने पाठकों की संख्या में वृद्धि  करने की कोशिश करें। ब्लॉगर आपको फीड में विज्ञापन डालने की सुविधा भी देता है और यकीन मानिये सप्ताह में एक दो प्याज इससे भी मिलते हैं। हिंदी चिट्ठों और पाठकों की संख्या में यदि इसी तरह वृद्धि होती रही तो जल्द ही आपको प्याज के साथ खाने को मुर्गा और पीने को विस्की भी मिलेगी।

About these ads
  1. अक्टूबर 6, 2007 को 11:28 अपराह्न पर | #1

    बड़ा अच्छा लेख लिखा है। हमको पाठक भी चाहिये और प्याज भी। चिट्ठाजगत के बारे में अच्छी जानकारी दी।

  2. अक्टूबर 7, 2007 को 9:37 पूर्वाह्न पर | #2

    आपसे सहमत हूँ जगदीश जी। पूरी फीड उपलब्ध कराने से नियमित पाठक बढ़ते हैं, दूसरे शब्दों में कहूँ तो यह एक बार आए पाठक को दोबारा भी चिट्ठे पर लाता है। फीड पाठकों को हमारे चिट्ठे से जोड़ती है। रोमन में लिप्यंतरण वाली सुविधा भी निश्चित रुप से फायदा ही पहुँचाएगी।

  3. अक्टूबर 7, 2007 को 11:08 पूर्वाह्न पर | #3

    अच्छा लेख.

  4. अक्टूबर 7, 2007 को 11:51 अपराह्न पर | #4

    बहुत बढ़िया लेख लिखा जगदीशजी । पिछले कुछ दिनों से चिट्ठाजगत के रोमन वर्जन को लेकर चल रही बहस के क्रम में एक जानकारीपूर्ण आलेख। अब आपके चिट्ठे पर जल्दी-जल्दी आकर ज्ञानार्जन करना होगा।

  5. अक्टूबर 11, 2007 को 7:17 अपराह्न पर | #5

    बढ़िया लेख, शुक्रिया!!

  6. aspundir
    मई 10, 2008 को 7:52 अपराह्न पर | #6

    i does not see page properly. here is seeing Boxes yet browser encoding UTF-8.

  7. Geetsangeet
    नवम्बर 24, 2010 को 6:45 अपराह्न पर | #7

    बढ़िया जानकारी दी, शुक्रिया

  1. अक्टूबर 11, 2007 को 2:54 अपराह्न पर | #1
  2. दिसम्बर 16, 2009 को 2:14 अपराह्न पर | #2

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Connecting to %s

Follow

Get every new post delivered to your Inbox.

%d bloggers like this: