1. जब आप अपने नाम की जगह दूसरों को अपने चिट्ठे का नाम बताने लगें और पते के स्थान पर URL बताने लगें।

2. जब आप सुबह सुबह उठते ही कंप्यूटर ऑन करके बैठ जायें या शौचालय में भी अपना लैपटॉप साथ ले जायें।

3. जब रु 25000/- प्रतिमाह की तन्ख्वाह से ज्यादा महत्वपूर्ण रोज के $0.08 लगने लगें।

4. जब खुद की साधुवादिता पर ही आपको हीन भावना होने लगे।

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मजा आ गया, मेरे घर के हालात आपको कैसे पता चले
जी, मैं उड़न तश्तरी…हा हा!!! बहुत सही.
ही ही ही!!
कार्टून में छिपी है हकीकत.
चिठ्ठाजगत को आखिरकार एक बेहतर कार्टूनिस्ट मिल ही गया… कम शब्दों में बहुत कुछ कह दिया…. मजेदार कार्टून!
बहुत खूब!
wah wah!! kya sahi kartoon banaaye hain
dekh ke barbas hansi aa gayi …..majdaar kartoon hai …
हे हे हे
जबरदस्त यार!! मजा आ गया!!
खुशकित्तई!!
शुक्रिया!!
मस्त।
बहुत अच्छे।
मजा आ गया।
मनीषा
ho ho ho ho :))
क्या बात है. कमाल कर दिया आइनाजी आपने. बहुत खुब.
मैं तरकश से संजय जोगलिखी.
इस ‘एडिक्शन’ को — इस लत को — आपने सही-सही पकड़ लिया है .
पंगेबाज आ गया है खबरदार कोई पंगा नही ..?
bahut badhiya jagdish ji aap ne sahi nabz pakdi hai
हा हा हा हा हा हा …………………………..ब्लागर के जीवन का सच आपने पन्ने पर उतार दिया
तीसरा वाला बढ़िया है!
हा हा, मजा आ गया। जबरदस्त!
वैसे तो सभी एक से बढ़कर एक हैं लेकिन तीसरे वाला खास पसंद आया।
लम्हें जिन्दगी को…….आईना देख बहुत मजा आ गया।
मुझे लगा था ये लत मुझे ही है अच्छा लगा सब का यही हाल है।
बहुत सुन्दर।
झकास!
मजा आ गया।
bahut hi umdaa hain ye!!
अति उत्तम !! जम कर कार्टून बनायें — शास्त्री जे सी फिलिप
हिन्दी ही हिन्दुस्तान को एक सूत्र में पिरो सकती है
http://www.Sarathi.info
बहुत बढ़िया कार्टून्स हैं.
एकदम शानदार और खूब दिमाग़ी पेंच लड़ाया है.. एकदम ओरीजिनल आइडियाज़ 
सभी कार्टून का एक टैग बनाया जाए (”हिन्दी कार्टून”
टाइप का, ताकि टैक्नोराती पर सारे कार्टून एक साथ दिख सकें।