आज जीतू भाई से दिल्ली में मिलने से पहले मैं अपना आयकर रिटर्न जमा करवाने ITO गया। कई सालों से देख रहा हूं कि दिल्ली के ITO ऑफिस में कैसा बुरा हाल है। ऑफिस के गलियारों और कमरों में पर्याप्त रोशनी नहीं है। कूलर दसियों साल पुराने हैं। जो रिटर्न हर साल हम बड़े चाव से बनाते हैं और बड़े शान से जमा करवाते हैं वह सब रिटर्न वहां यूंही खुले में जमीन पर पड़ीं दिखीं। मैने जब कर्मचारी से अपने 2004- 05 तथा 2005-06 के रिफंड के बारे में जानना चाहा तो उन्हों ने कहा की जुलाई के बाद ही आकर पता करें। मेरे यह पूछने पर कि क्या आप डाक से भिजवा देंगे कर्मचारी ने कहा कि आप खुद ही आकर पता कर लीजियेगा क्योंकि हमें तो डाक टिकट भी नहीं मिलते अपने पास से टिकट लगा कर भेजने पड़ते हैं।
अब पता नहीं कि कर्मचारी सच कह रहा था या बहाने से बुला कर कुछ अपनी जेब गर्म करवाना चाहता था।
आज सुबह ही अखबार में पढ़ा था कि सरकार के पास 5000 करोड़ रुपये का बकाया रिफंड पड़ा है। मंत्री जी इस पैसे के एक दिन के ब्याज के बराबर भी अगर आप आयकर विभाग के कार्यालयों के ऊपर खर्च करदें तो कैसा रहे? न सिर्फ यहां आधारभूत सुविधाओं की आवश्यकता है इसके साथ साथ सारे कार्यालय को कंप्यूटरीकृत कर करदाताओं के लिये उनके रिटर्न तथा रिफंड के बारे में ऑनलाइन जानकारी भी दिया जाना आवश्यक है। सरकार ने कर तथा रिटर्न जमा करवाने की तो समय सीमा निर्धारित की हुई है मगर रिफंड भिजवाने की कोइ समय सीमा तय नहीं की है।









अफसोस जनक. इन सब बातों को मिडिया को उठाना चाहिये ताकि मंत्रालय जागे.
अफसोस जनक है, मीडिया को ये बात वैसे ही जोर से उठानी चाहिये जैसे किसी सूरज या चंदा के गड्डे में गिरने की खबर।
मीडिया को गरिया कर उसी से मदद माँगी जा रही है
तो मीडिया वाले भाई, जागो और जनता की माँगे उठाओ.
ये सारा कामकाज ऑन लाइन हो जाना चाहिए. टंटा मिटे .
मीडिया आजकल इंसानों की दुनिया की बजाय भूत प्रेतों की दुनिया में रहने लगा है……….इसलिये ऐसी उम्मीद बेमानी है.
bilkul sahi hain ji