आज नारद पर एक बहुत ही मजेदार चीज देखने को मिली। नारद पर आयी हर पोस्ट का शीर्षक जैसे अपने पहले वाले पोस्ट के शीर्षक का ही जवाब था। यकीन न हो तो यहां देख लीजिये। मजे की बात यह है कि अधिकतर पोस्ट एक दूसरे के साथ साथ हैं।

रचनात्मकता नाम की कोई चीज़ नही है। - नारद का एकाधिकार खत्म होगा! 

हमारा तुम्हारा कोई रिश्ता नहीं है - बडे़ भाई की ब्लोगर मीट

विकी पर कोई गया तो फिर लौटाnarad-1.jpgnarad-1.jpg है? - समीर लाल - तुम अकेले नहीं

स्वर्ग मे बाथरूम नहीं…. - तॊलिया,इजिचेअर ऒर वेटिंग-रूम

यादोंके झरोखों से… - गोत्र को गाली देनेवालों, सुनो

नक्सलवाद को समस्या नहीं मानें - बोए पेड बबूल का

नमक खाओ तो सेंधा नमक खाओ - भूत और कामुकता के बीच विज्ञापन

नए और फ्लॉप लेखक हिट्स से विचलित न हौं - भूख का इलाज

गोत्र का स्त्रोत - अंधेरे में झांकती आँखें

ईर्ष्या - आज का विचार

मेरा एक गीत सूनें - पहला नशा ,पहला खुमार

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हमहूं छाप दिये अखबार

गुलजार साहब का ‘झूम बराबर झूम’ और ‘टिकट टू हॉलिवूड’


19 Responses to “यह चिट्ठाचर्चा नहीं है फिर भी…”  

  1. 1 Rajesh Roshan

    creative work :)

  2. 2 संजय बेंगाणी

    कमाल कर दिया आपने.

  3. 3 afloo

    अपनी पोस्ट के अलावा दो और पोस्टों के शीर्षकों पर यह ‘जुड़ना’ कल ही देखा था।आपने गहराई से देखा और यह सुन्दर पोस्ट ,रची।साधुवाद।

  4. 4 rachna

    EXCELLENT no words to say what a beautiful way to summarize

  5. 5 समीर लाल

    इजाजत दें तो इसे आज की चिट्ठाचर्चा मान लें. :) बेहतरीन!! बधाई.

  6. 6 masijeevi

    वाह वाह

  7. 7 arun

    kuC lagaa to muJe BI thaa ki ye juDI huI hai,इसी च्क्कर मे मैने एक के साथ दूसरी देखी
    पर आपने तो मजा बांध दिया जी,यहा भी मै समझा था की ये दिल्ली मे मनीष जी से मिलने की रिपोर्ट होगी :)

  8. 8 सागर चन्द नाहर

    बहुत बढ़िया

  9. 9 Sanjeet Tripathi

    जबरजस्त!!

  10. 10 SHUAIB

    आपके आईडियाज़ का जवाब नहीं मिलता।

  11. 11 दीपकबापू

    bahut badhiya,
    deepak bharatdeep

  12. 12 संजय पटेल

    रचनात्मकता की शुरूआत कहीं से भी हो सकती है..आँखें रहें खुली और मन हो आनन्दमय तो शब्द अपने आप झरने लगते हैं..मैं इश्तिहारों की दुनिया में पिछ्ले पच्चीस बरस से लिख रहा हूं और महसूस किया है कि बेस्ट आँफ़ द काँपी वहाँ से निकलकर आती है जहाँ आप सबसे कम देखते हैं..ये अंदाज़े बयाँ बहुत अच्छा लगा.साधुवाद.

  13. 13 DR PRABHAT TANDON

    कमाल है :)

  14. 14 अनूप शुक्ल

    अच्छी जुगलबंदी है!

  15. 15 Purnendu Singh Chauhan

    Now I am sure that Hindi would find its way in the International Literature.

    Thanks to Internet and thanks to such people who care to express their feelings in Hindi.

    Regards

    Purnendu
    http://www.younguttaranchal.com

  16. 16 mamta

    लाजवाब !!

  17. 17 Shrish

    मजेदार, आपकी कल्पना खूब रही। :)

  18. 18 अजित वडनेरकर

    मान गए आपकी पैनी-पारखी नज़र को

  19. 19 Nandan Jha

    folks,

    Madad chhayeay bhai log. thoda gyan baantiey.

    How can I write in Hindi. My travel blog at http://www.ghumakkar.com is powered by WP. While composing a post, I can copy-paste text from quillpad and it looks fine but when I save and publish, what I see is just ???? ????? ?????

    What should I do ?
    thanks
    Nandan

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