हमहूं छाप दिये अखबार
21Jun07
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आईना का ना-रद्द विशेषांक पसंद आया !
अगले अंक की प्रतिक्षा है
अइसे लिखियेगा त बैन हो जयियेगा ना जी..? वैसे हमको तो बहुत मजा आया ई पढ़ के। तो हम आपके बैन का विरोध करते हैं। (अग्रिम विरोध ही उचित है)
हा हा, बढ़िया !!
अगला अंक कब ?
आपका संपादकीय ही सबसे बड़ा झूठ है. बाकी सब सत्य है.
बढ़िया, कड़क व्यंग्य.
वाह-२, मजा आ गया जी, अगले अंक की प्रतीक्षा है!
ha ha ha………………
kimat de di.. aur apaka paper bhi padha liya. Badhiya prayas! Badhayi Shukul ji ko bhi, jinhone aapko iske liye prerit kiya………
बहुत रचनात्मक! इसे बनाने में बहुत मेहनत लगती है! शानदार शुरुआत.
मज़ा आ गया.
हम इसके विरोध और बैन मे समर्थन मे है, ये चाल है हमारा अखबार बंद कराने की,हमे इसमे सामप्रादायिकता दिखाइ दे रही है और जो इसका समर्थन करेगे हम उनको गुजरात मोदी जैसी गालिया देगे
काहे की इत्ते अच्छॆ अखबार के सामने हमारा अखबार कौन पढेगा
असली फ़ुरसतिया टाइम्स जिन्दाबाद
बहुत खूब। हर मिनट कीमत चुका रहे हैं। ठहाके लगा रहे हैं।
वाह वाह!! क्या अंदाज है नये संपादक साहब का. बहुत खूब, लगे रहो, हा हा!!!
कीमत से कुछ ज्यादा ठहाके हमारे मुँह से गिर पड़े हैं- बकाया वापस करें।
और हॉं समीर जी ने क्लास लेके सिखाया था कि हाट स्पाट बनाकर लिंक कैसे दें- उसी का इस्तेमाल करें।
अमां भैया, अगर ऐसे ही आप लिखते रहे तो हमें तो पढने पर मज़बूर ही होना पडेगा ना. काहे से, कि छोडा भी नही जा सकता.
तो बाकी सब काम बन्द .बस आईना समाचार .
पढ कर हसीं इतनी आई कि मेरी राय मेँ नाम होना चाहिये:
” हसी ना आई ना (?) समाचार “.
वाह्! मज़ा आ गया। सन्दर्भ समझ् नही आया क्योन्कि नारद से जान पह्चान नही है। पर मज़ेदार है!
हम्म मजेदार रहा पहला अंक, उम्मीद है अगले अंक और भी मजेदार होंगे।
हा हा हा हा
दूसरा अंक कब आएगा
विशेषांक पसंद आया
विशेषांक पसंद आया.
विशेषांक पसंद आया.