हिंदी चिट्ठाकारिता के हर आयाम को छूता सुजाता जी का विस्तृत लेख आजके रविवारी जनसत्ता में छपा है। पूरे पेज को स्कैन करना मुमकिन नहीं था तो अलग अलग हिस्से स्कैन किये हैं।

चित्रों को बड़ा देखने के लिये इन पर क्लिक करें।

 


27 Responses to “जनसत्ता पर देसी चिट्ठे”  

  1. 1 नीरज दीवान

    बधाई. अब तक का सबसे बढ़िया लेख ब्लॉगजगत को समेटने वाला.

  2. 2 संजय बेंगाणी

    सुबह सुबह दिल्ली का अखबार पढ़ लिया :) धन्यवाद.

  3. 3 समीर लाल

    बहुत सही. बधाई सबको. :)

  4. 4 Shrish

    अरे भईया सभी जगहों के अखबारों में है या सिर्फ किसी खास प्रदेश के। जरा रुकिए मैं पता कर आता हूँ मेरे शहर में है या नहीं…

  5. 5 Shrish

    ब हू हू, यहाँ तो मिला नहीं, बुक स्टाल वाला कहता है न्यूज ऐजेन्सी से पता करो। खैर इन इमेजों से ही पढ़कर संतोष कर लेते हैं। इन्हें उपलब्ध कराने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद!

  6. 6 जगदीश भाटिया

    श्रीश, मैं भी सुबह सुबह उठ कर अखबार वाले के पास गया और आखिरी कापी जो उसने अपने नियमित ग्राहक के लिये रखी थी उससे जबर्दस्ती ले आया :)

  7. 7 Soochak

    अरे हूजूर आगे आगे देखिए होता है क्या। जमाना के बदलाव के साथ साथ हिंदी को फलक पर लाने की ये तो बानगी भर है

  8. 8 raviratlami

    हमें तो सिरफ सुकुल जी ही दिक्खे हैं :)

    बहुत बढिया. इससे अच्छी कवर स्टोरी हो ही नहीं सकती थी.

  9. 9 शैलेश भारतवासी

    इस बार का कवरेज़ बेहतर है। वैसे इससे अधिक स्पेस मिलना मुश्किल ही है। इसमें हिन्दी के सभी महत्वपूर्ण चिट्ठों का जिक्र है।

  10. 10 kakesh

    अच्छी प्रस्तुति .. लगभग सब कुछ समेट ही लिया गया.

    काकेश

  11. 11 सुरेश चिपलूनकर

    चलो कोई तो सुध ले रहा है ना.. और ये तो शुरुआत है.. आगे-आगे देखिये होता है क्या..जब कोई हजारों-हजार चिठ्ठे लिखने वाले हो जायेंगे तब तो अंग्रेजी वालों को भी इधर ध्यान देना ही पडेगा..हिन्दी से नाक-भौं सिकोडने से अब काम नहीं चलने वाला..

  12. 12 पंकज बेंगाणी

    badhai

  13. 13 Rajesh Roshan

    Ye hindi ki net par aahat bhar hai. Aage iski dhamak aisi hogi ki humlogo in sabko net par upload kar thak jayenge. kyonki ye charcha e aam ho jayega.

  14. 14 Sanjeet Tripathi

    अपन ने प्रेस में आराम से बैठ कर पढ़ा क्योंकि वहां डेली फ़ाईल में सभी अखबार जोड़े जाते हैं। हिन्दी चिट्ठाकारी को अपने आप मे समेटता हुआ एक बेहतरीन लेख, लेखक के लिए साधुवाद और इसे स्केन कर यहां उपलब्ध करवाने के लिए आपको धन्यवाद ।

  15. 15 anamdas

    बहुत अच्छा, ज़ोरे कलम हो और ज़ियादा. ब्लॉग महात्म्य कथा और छपनी चाहिए. सुजाता जी को ढेर सारी बधाइयाँ और शुभकामनाएँ.

  16. 16 अनूप शुक्ला

    वाह ये कवरेज देख के मन खुश हो गया। सुजाता जी को बधाई। धन्यवाद हमारा फोटू मय साक्षात्कार के चिपकाने के लिये। जगदीश भाटिया जी को शुक्रिया इसे यहां पेश करने के लिये!

  17. 17 अनूप शुक्ला

    बहुत अच्छे। मन खुश हो गया अपना फोटू भी देखकर। सुजाताजी को शुक्रिया। जगदीशजी को भी शुक्रिया इसे सबको दिखाने के लिये! रविरतलामीजी को एक बार फिर से शुक्रिया हमें ब्लागिंग में घुसाने के लिये!

  18. 18 नीरज दीवान

    विडम्बना है कि जो अख़बार अपनी तेजतर्रार लेखनी के लिए जाना जाता हो और जो व्यवस्था के ख़िलाफ़, कट्टरता के ख़िलाफ़, कुरीतियों के खिलाफ़ लिखता आ रहा हो.. वह अब जनता तक नहीं सुलभ नहीं. मीडिया में पसरे पूंजीपति उन सारी आवाज़ों को दबा देते हैं जो विचारधारा के तल पर सामाजिक क्रांति की अलख जगाता है. जनसत्ता का भी यही हश्र किया जा चुका है.

    यह तो ‘जनसत्ता’ की दूरदृष्टि है जो नेट पर हो रही हिन्दी क्रांति की पदचाप सुन चुका है और इसे अहम स्थान देने का मन बनाया. मज़े की बात यह है कि कुछ ऐसे भी हैं जो जनसत्ता के इस परिशिष्ट पर फूले नहीं समा रहे कि…. देखो कितना बड़ा छापा है!! लेकिन वही लोग अंदर के पन्नों में छपा संपादकीय पढ़कर नाक-भौं सिकोड़ लेते हैं. यानी मीठा मीठा गप गप .. कड़वा कड़वा थू थू. यह दोहरा मापदंड है.

  19. 19 सृजन शिल्पी

    किसी अख़बार में हिन्दी चिट्ठों के बारे में यह अब तक की सबसे व्यापक कवरेज रही। जनसत्ता में कवर स्टोरी का होना अपने-आप में बहुत मायने रखता है। लेखिका को बहुत-बहुत बधाई।

    जगदीश जी, इसे प्रस्तुत करने के लिए आपका भी आभार।

  20. 20 Tarun

    वाकई में विस्तृत लेख है जितने अब तक पढ‌े हैं, इस सराहनीय प्रयास के लिये सुजाता को बहुत बहुत बधाई। जगदीश जी आपको भी स्केन करके छापने के लिये साधुवाद।

  21. 21 Amit

    वाह-२, वाकई अभी तक की सबसे विस्तृत कवरेज है। :)

  22. 22 जीतू

    भई अपने इधर तो जनसत्ता आता ही नही। देश के कई हिस्सों मे नही मिलता तो समुन्दर पार कैसे मिलेगा?

    जितना पढा, उतना पढकर बहुत अच्छा लगा। सबसे ज्यादा धन्यवाद नोटपैड (सुजाता जी) को। काफी अच्छा कवरेज है, अनूप शुक्ला का इन्टरव्यू भी छापे, अनूप की तो बल्ले बल्ले हो गयी। बहुत अच्छा लगा।

    भाई जगदीश भाटिया को भी बहुत बधाई, कि उन्होने इसको नैट पर उपलब्ध कराया। अब कोई भाई इसको नैट पर टीप दे,( लाइन बाइ लाइन) तो हमारे जैसे दूरदेश बैठे लोग भी पढ सकेंगे।

    सच तो यह है कि अभी हिन्दी के कदम है, ये तो शुरुवात है। इन्टरनैट पर हिन्दी के सुनहरे भविषय का पहला कदम। जैसे जैसे हिन्दी ब्लॉगिंग का क्षेत्र बढता जाएगा, वैसे वैसे हर तरह के लोग इसकी तरफ़ आकर्षित होंगे। अच्छे भी बुरे भी। इससे इन्टरनैट पर हिन्दी का सर्वांगीण विकास होगा।

    चिट्ठाकारों पर भी परिक्व होकर व्यवहार करने की जिम्मेदारी बढेगी। (इस बारे मे विस्तार से फिर कभी)

  23. 23 हिंदी ब्लॉगर

    बहुत बढ़िया. एक बार में इससे ज़्यादा कवरेज संभव नहीं हो सकता. सुजाता जी को धन्यवाद!

  24. 24 chandrika

    i think that in print we have a lot of magzeen as aalternat but in electranic we could,nt do without captlist saport but due to blog it is passible so in my viw it,s the altarnat electranic media reseumble the main streem electranic media………….

  25. 25 हरिराम

    जनसत्ता ने बहुत अच्छी तरह नकल हिन्दी चिट्ठों के स्क्रीनशॉट (चित्रों की नकल) छापी है, और आपने उससे भी कहीं ज्यादा अच्छी तरह जनसत्ता अखबार की कतरनों के चित्र इस ब्लॉग पर छाप दिए हैं। धन्यवाद! अब लोग इन स्क्रीनशॉट का विविध स्थानों पर उपयोग कर सकेंगे आपके चिट्टे का सन्दर्भ देते हुए।

  26. 26 हरिराम

    जनसत्ता ने बहुत अच्छी तरह नकल हिन्दी चिट्ठों के स्क्रीनशॉट (चित्रों की नकल) छापी है, और आपने उससे भी कहीं ज्यादा अच्छी तरह जनसत्ता अखबार की कतरनों के चित्र इस ब्लॉग पर छाप दिए हैं। धन्यवाद! अब लोग इन स्क्रीनशॉट का विविध स्थानों पर उपयोग कर सकेंगे आपके चिट्ठे का सन्दर्भ देते हुए।

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