मुलायम मेरा तकिया है
राजनीति में उम्र का कुछ हिसाब हमें समझ नहीं आता। अपने राहुल गांधी 30+ हो गये मगर उनके विरोधी उन्हें बच्चा कहते रहते हैं। राजनीति में अकसर मैंने देखा है कि चालिस के न हुए तो आप बच्चे हैं, पचास पार नेता को युवा नेता कहा जाता है और शीर्ष तक पहुंचते पंहुचते नेता सत्तर पार हो जाता है। राजीव गांधी जब प्रधान मंत्री हुए तो युवा प्रधानमंत्री कहा जाता था, उस समय मुझे अकसर यह प्रश्न सताता रहता था कि सुनील गावस्कर 36 की उम्र में बूढ़े खिलाड़ी कहे जाते हैं और पैंतालिस के राजीव युवा? राजनीति में सब गड़बड़ है। जो कहा जाता है वो होता नहीं और जो होता है वह कहा नहीं जाता। उत्तरप्रदेश जैसे राज्य में चुनाव हो रहे हैं पर हिंदी चिट्ठों पर उन पर कोई खास चर्चा नहीं हो रही। इससे यही साबित होता है कि अब हम लोगों को न तो राजनीति से कोई रुचि है और न ही कोई उम्मीद। यह एक भयावह स्थिति है। शायद नेताओं को हमारी बात समझ नहीं आती और हमें नेताओं की।
दिल्ली में भी पालिका चुनाव हो रहे हैं, छोटे चुनाव क्षेत्र होने की वजह से चुनावों का प्रचार ज्यादा दिखाई दे रहा है। जैसा कि मैंने कहा कि राजनीति में कहा कुछ जाता है और समझ कुछ आता है। जब बड़े बड़े समझ नहीं पाते तो बच्चे क्या समझेंगे? महिलाओ और बच्चों के एक जलूस में जब नारे लग रहे थे - ‘मोहर लगेगी हाथ पे’ तो मेरा सात वर्षिय बेटा समझा कि कह रहे हैं ‘मुंबई हॉफ प्लेट।’ एक बात और उसे समझ नहीं आती कि ‘मुलायम मेरी पाठशाला है’ में मुलायम किसी का नाम भी हो सकता है, वह इसका शाब्दिक अर्थ ही समझता है और अकसर बोल पड़ता है ‘मुलायम मेरा तकिया है।’









खेल और अन्य कार्य तो व्यक्ति बचपन से करता या कर सकता है किन्तु राजनीति औसतन २० वर्ष की आयु से करना शुरु करता है. तो २० से ४० तक बच्चा(१ से २० वर्ष का), ४०-६५ तक युवा( २१ से ४५ वर्षीय), ६५ से ७५ या ८० तक अनुभवी(४६ से लगभग ५५ या ६० साल का) और ८० के बाद या तो स्वर्गवासी अन्यथा मानसिक असंतुलन का शिकार (जैसे अर्जुन सिंग/ वी पी सिंग आदि और भी बहुत से हैं )…
आशा है राजनीति में उम्र का हिसाब अब आप समझ गये होंगे.
बाकि रही बच्चों की बात, वो तो अपनी ही एक अलग स्वच्छ दुनिया है, वो इन्हें जब तक न ही समझें तब तक बेहतर.
ही ही ही, वाह-२ समीर जी, माने हुए तो पहले से ही थे आपको, आज डबल मान गए!!
पोस्ट व कोमेंट दोनो ही मजेदार.
वाह वाह
बात आपकी सही है कि राजनीति में हमारी रुचि नहीं रही..और आपके बेटे की मासूमियत का सोच कर दिल खिल गया..
धन्यवाद, मित्रों. बस यूँ ही मौज मजे चलते रहें.
achcha shirshak hai .. Mulayam mera Takiya hai
समीरजी ने मिर्च-मसाले के साथ समाधान कर दिया है ।
Namaskar, bahut hi acha likha aapne rajniti ke barein mein, aur aapke bache ne bhi abhut acha kaha ki mulayam mera takiya hai……….
राजनीति पर आपने बहुत ही अच्छा व्यंग्य लिखा है। इतने अच्छे ब्लोग्स लिखने के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद्