झा साहब ने खरीदा लैपटॉप
झा साहब से परिचय करवाने से पहले अपको पिछले सप्ताह की एक बात बताता हूं। मैं नोएडा में था। अपने एक सरदारजी दोस्त से काम के सिलसिले में मिलने गया था। बातों बातों में सरदारजी ने शेयर बाजार के बारे में एक सवाल पूछा। उन्होंने पूछा कि यह कैसे पता लगाया जाये कि शेयर बाजार कब अपनी पूरी ऊंचाई पर है और वो कौन सा समय हो जब शेयर बाजार से सब कुछ बेच कर बाहर आ जाना चाहिये। मैंने कहा कि इस बाजार में कभी बदहवास को कर माल न ही बेंचे तो अच्छा। अगर आपने अच्छी कंपनी का शेयर लिया है तो बाजार की चाल कैसी भी हो, आप घबरायें नहीं। सरदारजी मेरे जवाब से संतुष्ट नहीं हुए। उन्हें सीधा जवाब चाहिये था। “आप लक्षण बताईये जिन्हें पहचान कर इशारा मिल जाये कि अब बाजार गिरने वाला है” उन्होंने पूछा।
अब बताइये, इस सवाल का जवाब कौन दे सकता है? फिर भी मैंने एक पुरानी मान्यता की बात उन्हें बताई। ” जब हर कोई शेयरों की बात करने लगे तो समझो कि अब आपका समय यहां से निकलने का हो गया।”
” हर कोई शेयरों की ही तो बात करता है।” वो भोलेपन से बोले। यह बात भी सही है कि समाज के जिस वर्ग में सरदार जी रहते हैं वहां ज्यादातर लोग शेयरों में निवेश करते हैं।
“मगर जब आपका ड्राईवर भी शेयरों की बात करने लगे तो समझें समय आ गया है” मैंने मुस्कुराते हुए कहा।
अब झा साहब की बात। बहुत मजेदार चरित्र है उनका। झा साहब खुद में मस्त रहते हैं। जब बोलना शुरू करते हैं तो रोकना मुश्किल हो जाता है। एक बार जो निर्णय ले लें तो किसी की नहीं सुनते बस कर गुजरते है। झा साहब कितना पढ़े लिखे हैं यह तो मैंने कभी पूछा नहीं मगर अंग्रेजी में “यू गो”,” आई कम” से आगे पैदल हैं। आगे भी आपको उनके किस्से सुनाता रहुंगा। हम एक ही कालोनी में रहते हैं। झा साहब कुछ खास नहीं करते। दो बच्चे होने के बाद भी अपने परिवार का जिम्मा वो अपने पिता पर ही डाले हैं। कल अचानक आ धमके। बोले लैपटॉप लिया है। इंटेरनेट नहीं चल रहा, जरा सहायता कर दें।
“अरे वाह! क्या कन्फिग्रेशन है?” मैंने उत्सुकता दिखाते हुए पूछा।
झा साहब समझ नहीं पाये।
“इसमें क्या क्या लगा है” मैंने फिर पूछा।
अब झा साहब का चेहरा बता रहा था कि मैंने क्या अनाड़ियों वाला सवाल पूछ लिया है।
“ये स्पीकर लगे हैं, यहां सीडी लगती है, ये फोन की लाईन है और यहां, यह लगता है।” झा साहब ने मुझे यूएसबी पोर्ट और पेन ड्राईव दिखाते हुए कहा।
आगे की बातों से पता चला कि झा साहब पचास हजार का लैपटॉप खरीद लाये हैं बिना यह जाने कि दो लैपटॉप के मॉडल्स में क्या क्या फर्क हो सकता है। हार्ड डिस्क, रैम और प्रोसेसर जैसे् शब्द उन्हों ने पहली बार मुझसे ही सुने। झा साहब ने लैपटॉप पर गाना बजाना सीख लिया था और इस बात से बार बार उत्तेजित हो जाते कि कैसे लैपटॉप पर अंगुली घुमाने से गाने की आवाज कम और ज्यादा हो जाती है।
मैं यह जानने के लिये बहुत बेताब था कि झा साहब ने किस उद्देश्य के लिये लैपटॉप खरीदा था। कुछ देर में इसका भी खुलासा हो गया।
“इंटेरनेट पर शेयर ट्रेडिंग करूंगा।” उन्होंने बताया।
“आपको बाजार की जानकारी है?”
“इसमें जानकारी क्या? सुबह खरीदा, शाम को बेचा। सौ रुपये भी बढ़ गये तो अपनी जेब में।” झा साहब ने बहुत ही लापरवाही से बताया।
“मगर झा साहब शेयरों में वही पैसा लगाइये जो डूब भी जाये तो गम न हो” मैंने चिंतित होते हुए कहा।
“ज्यादा नहीं, एक लाख से ही शुरू करुंगा, आप चिंता न करें, पिता जी पिछले महीने ही रिटायर्ड हुए हैं, पैसों की कमी नहीं।” जाते जाते झा साहब ने कहा।
झा साहब के जाने के बाद थोड़ी देर तक मैं खुद ही हंसता रहा। मगर अचानक मुझे पिछले सप्ताह सरदारजी से हुई बातें याद आ गयीं। मेरा दिल धक से रह गया।
क्या वाकई यह बात कोई संकेत देती है?
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अरे, ऐसे लोगों की कमी नहीं…जो कर पाओ थोडी बहुत मदद कर दो झा साहब की…
हां संकेत है न। झा साहब अभी तक अपने बच्चों सहित बाप के ऊपर लदे हैं। उनको मुफ़्त की कमाई की लत लगी है!
शेर बाजार और सटा-बाजार में जबरदस्त घाल मेल हो गया है. आश्चर्य होता है, क्या लोगो के पास उड़ाने के लिए इतने पैसे है?
झ साहब जैसो को कौन बचा सकता है, जो खुद ही कटने को तत्पर हो.
mazaa aa gaya ye padh kar.. Jha sahab se hamein koi hamdardi nahi hai.
Un ke pitaji par afsos zaroor hota hai.. kis tarah se ma baap apne bachhon ki shaadi kar dete hain, jab vo is tarah ke ho to..
झा साहब की मदद करते रहिए, पुण्य मिलेगा:-)
झा साहब भी अब शेयर ट्रेडिग करेंगे मतलब अब वह समय आ ही गया है, सावधान!!
ऐसे लोगों की कमी नही जो आखिरी दम तक बाप की कमाई पर मौज उडाते रहते हैं। तो देर किस बात की आप भी बहती गंगा मे हाथ धो लीजिये
उनके तमाम अज्ञान के बावजूद झा साहब(?) के साथ मेरी हमदर्दी है. और उनसे भी ज्यादा उनके पिता श्री के प्रति . बड़े/सीनियर झा जी की भलमनसाहत और हिम्मत की दाद देनी पड़ेगी . वैसे बड़े झा जी लिये यह काम उनके पुत्र कर रहे हैं पर नई पेंशन योजना के तहत अब नये कर्मचारियों के लिये यह काम सरकार खुद ही कर देगी . सो बच्चों पर अब कोई दोष नहीं आएगा .
इस देश के बहुसंख्यक लोगों के लिये शेयर बाज़ार और कैसीनो में कोई खास फ़र्क नहीं है . बहुसंख्यक लोग इसकी किसी भी आधारभूत जानकारी के बिना हवा और अफ़वाह पर ही भरोसा करते हैं . जिस देश में ‘इन्वेस्टर’ कम हों और’स्पेकुलेटर’ ज्यादा वहां शेयर बाज़ार के प्रति आम धारणा यही होती है . और फिर जब इंडेक्स इतना संवेदनशील, बल्कि हाइपर सेन्सिटिव हो कि जरा-जरा सी बात पर नीचे-ऊपर होने लगे तो फ़ंडामेंटल्स भी धरे रह जाते हैं . उसके बाद पर्दे के पीछे की दुरभिसंधियां और स्कैंडल्स .
यह हमारे समय का दुर्भाग्य ही है कि यहां आदमी ज्यादा असंवेदनशील होता जा रहा है और शेयर बाज़ार का इंडेक्स अधिकाधिक संवेदनशील . और अब वही देश की संपन्नता और समृद्धि का सूचक भी माना जाने लगा है .
अगर कोई अन्यथा बात कही हो तो भाटिया जी से अग्रिम क्षमा चाहूंगा क्योंकि यह एक ऐसे कायर आदमी का प्रलाप है जिसने ४४ साल के कुल जीवन और १९ साल के कमाऊ जीवन में आज तक शेयर बाज़ार में एक छदाम लगाने की हिम्मत नहीं जुटाई .
लगता है भाटिया जी से मिल कर कुछ टिप्स लेनी पड़ेंगी .