मत रोको हवाओं को
मार्च का महीना हमारे लिये बहुत ही व्यस्ततम महीना होता है।
मैंने फैसला किया था कि मार्च में कोई पोस्ट नहीं लिखूंगा, मगर आज लिखनी पड़ रही है। व्यस्तता के कारण ही कल केवल एक जरूरी मेल देखने के लिये सुबह कम्प्यूटर चलाया था और बंद करने लगा तो नारद के फीड पर संजय भाई की पोस्ट के शीर्षक पर नजर गयी। मुझे लगा कि इसका तीव्र विरोध होना चहिये तो जल्दी में एक लाईन की पोस्ट करके चला गया। यकीन मानिये मेरा उद्देश्य कोई सनसनी फैलाना या ड्रामा खड़ा करना नहीं था। थोड़े में तीव्र विरोध जताने का मुझे यही तरीका सूझा।
उस दिन उस महिला को देखता था टीवी पर जब वह रो रो कर निवेदन कर रही थी कि इस फिल्म को अपने राज्य में प्रदर्शित हो जाने दीजिये, शायद मेरा बच्चा मुझे मिल जाये।
मुझे लगा कि एक मां की तस्सली के लिये ही सही, यह फिल्म देश के हर हिस्से में दिखायी जानी चाहिये मगर मैं अपने आप को इस विषय पर बेबस महसूस कर रहा था।
कल सुबह मुझे वही बेबस मां और अपनी बेबसी याद हो आई। मगर मुझे लगा कि नारद के मुद्दे पर मैं इतना बेबस नहीं हूं, यहां शायद मेरी बात भी सुनी जा सकेगी, तो जोरदार तरीके से अपनी बात रखनी चाही।
मेरी यह पोस्ट पाबंदी के विचार के खिलाफ थी। निजी तौर पर संजय भाई के खिलाफ नहीं।









सही है। हम आपकी भावना को समझते हैं। संजय बेंगाणी को भी समझो। उनके अपने विचार हैं उन्होंने व्यक्त किये। इतनी बात पर उत्तेजित नहीं होना चाहिये। हड़बड़ी में पोस्ट नहीं लिखनी चाहिये-गड़बड़ी होती है।
मार्च का महीना अच्छा बीते इसके लिये शुभकामनायें!
सही है. उत्तेजना की झलक दिख गई थी. आपको इतने समय से जानते हैं कि सब समझ पाये अन्यथा यूँ थोड़ा हड़बड़ाहट में आये विचार रुक कर लिखना चाहिये. आईंदा बार ध्यान दें मेरे भाई.
आप तो हमेशा सधा हुआ लिखते हैं…उसी के तो हम कायल हैं!! 
आपका मार्च माह फलदायी हो, मेरी शुभकमनाएं.
आपकी पोस्ट पढ़ कर चहरे पर मुस्कुराहट दौड़ आई थी, क्योंकि आपको अच्छी तरह से जानता हूँ, मगर आप मुझे समझने में चुक गए.
दूषीत हवाओं को रोकना पड़ता है.
जगदीश भाई
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बहुत सही चीज है।
ऐसे कैसे चले जाते ? हम तो घर के सामने धरने पर बैठ जाते .. अब जाने की जिद ना करो सैयां.. अरे .अरे मुझे अभी तक भंग चढ़ी हुई है.. सोता हूं.. जाना नहीं .. यहीं रहना..
आपका माह शुभ हो
अभी तक आपने मेरे एक प्रश्न का उत्तर नही दिया है अप्रेल मे फिर पूछूगा अगर न मालूम हो तो कहियेगा कि नही मालूम
आपकी बात और आपका भावनात्मक आवेग समझ सका .