जगदीश भाई,
आप तो परिपक्व चिट्ठाकार है, ऐसे कैसे लिख दिया? और आपने ऐसे कैसे सोच लिया कि हम नारद से कोई चिट्ठा हटाने जा रहे है।
अविनाश भी मेरे अनुज की तरह ही है, यदि कोई बात होती भी है अविनाश मेरे से सिर्फ़ एक फोन की दूरी पर है। हर मसला बैठकर सुलझाया जा सकता है। ब्लॉगिंग मे सभी तरह के विचार सामने आएंगे। हमे उन सभी का सामना करने की क्षमता होनी चाहिए।
अपनी इस एक लाइना पोस्ट को शाम को फिर पढिएगा, आप अपने ऊपर ही मुस्कराएंगे।
मस्त रहो यार!
बंधु, अच्छा होता आप इस तरह सपाट गुस्सा ज़ाहिर करने की बजाय उसे थोडा आर्टिकुलेट करते. वर्ना यह तो है कि आनेवाले दिनों में ऐसी नौटंकियां और-और चलेंगी.
-प्रमोद सिंह
जगदीश जी; आईना क्यों हटे?
संजय जी ने अपनी बात कही है. संजय जी को भी तो अपनी बात कहने का हक है ना?
मैं भी आपकी तरह हर सैंसरशिप का विरोधी हूं पर आईना को हटाने की बात मत कीजिये.
धुरविरोधी
भाटीयाजी,
अगर आईना हटेगा तो उससे पहले जोगलिखी बन्द होगा. क्या आप भी. बात का मर्म तो समझते.
ऐसा लिख कर आप मुझ पर सेंसंरशीप नहीं डाल रहे है? मैं नारद का कर्ता-धर्ता नहीं हूँ, मैने केवल अपने मन की बात लिखी है. ऐसी बाते परदे के पीछे होती रहती है. मैने सार्वजनिक मंच पर उठाया है, बस.
क्या मैं आपको नौटंकिबाज लगता हूँ? सोच समझ कर लिखा है. इसके अच्छे परिणाम आएंगे, प्रतिक्षा करें.
गांधीगिरी करें..हटने हटाने की बात कर मन को व्यथित न करें. सुबह से परेशान है. नारद विवेक और विद्वता के लिए समूचे ब्रह्मांड मे माने जाते हैं. उन पर भरोसा रखें.
उठें और जादू की झप्पी अवश्य दें..
काहे को हटने के पीछे पड़े हो!
जगदीश भाई,
आप तो परिपक्व चिट्ठाकार है, ऐसे कैसे लिख दिया? और आपने ऐसे कैसे सोच लिया कि हम नारद से कोई चिट्ठा हटाने जा रहे है।
अविनाश भी मेरे अनुज की तरह ही है, यदि कोई बात होती भी है अविनाश मेरे से सिर्फ़ एक फोन की दूरी पर है। हर मसला बैठकर सुलझाया जा सकता है। ब्लॉगिंग मे सभी तरह के विचार सामने आएंगे। हमे उन सभी का सामना करने की क्षमता होनी चाहिए।
अपनी इस एक लाइना पोस्ट को शाम को फिर पढिएगा, आप अपने ऊपर ही मुस्कराएंगे।
मस्त रहो यार!
बंधु, अच्छा होता आप इस तरह सपाट गुस्सा ज़ाहिर करने की बजाय उसे थोडा आर्टिकुलेट करते. वर्ना यह तो है कि आनेवाले दिनों में ऐसी नौटंकियां और-और चलेंगी.
-प्रमोद सिंह
जगदीश जी; आईना क्यों हटे?
संजय जी ने अपनी बात कही है. संजय जी को भी तो अपनी बात कहने का हक है ना?
मैं भी आपकी तरह हर सैंसरशिप का विरोधी हूं पर आईना को हटाने की बात मत कीजिये.
धुरविरोधी
अरे भाटियाजी यह क्या?
इतना भावुक मत होइए. संजय भाई ने अपना विचार ही रखा है, नारद से कुछ हटा नहीं है।
हटेगा तो भारी बहुमत की सहमति होने और विचार विमर्श के बाद ही।
वैसे भी नारद निजि सम्पत्ति नहीं है, सार्वजनिक है।
चर्चा के लिए विषय रखा गया है, आप भी अपने विचार दीजिए. और इस विषय पर स्वस्थ चर्चा जरूरी भी है।
सॉरी, मैं तो बहुत अनुज हुँ आपसे.. सलाह देना अनुचित सा लगता है, माफी चाहता हुँ।
भाटीयाजी,
अगर आईना हटेगा तो उससे पहले जोगलिखी बन्द होगा. क्या आप भी. बात का मर्म तो समझते.
ऐसा लिख कर आप मुझ पर सेंसंरशीप नहीं डाल रहे है? मैं नारद का कर्ता-धर्ता नहीं हूँ, मैने केवल अपने मन की बात लिखी है. ऐसी बाते परदे के पीछे होती रहती है. मैने सार्वजनिक मंच पर उठाया है, बस.
क्या मैं आपको नौटंकिबाज लगता हूँ? सोच समझ कर लिखा है. इसके अच्छे परिणाम आएंगे, प्रतिक्षा करें.
आप भी न!! आँखें नम हो गई और गला भर आया! अब कुछ नहीं बोला जा रहा.
कोई बताए ये माजरा क्या है आईना तुम्हे हुआ क्या है?
गांधीगिरी करें..हटने हटाने की बात कर मन को व्यथित न करें. सुबह से परेशान है. नारद विवेक और विद्वता के लिए समूचे ब्रह्मांड मे माने जाते हैं. उन पर भरोसा रखें.
उठें और जादू की झप्पी अवश्य दें..
ये क्या भाटिया जी,
होली की भंग का असर अब तक है क्या ? काहे हटाईये आईना को ?
स्माईली लगा दिया है, अन्यथा ना लें !