वे आ रहे हैं

यह बात हिंदी चिट्ठाजगत में अकसर पढ़ने को मिलती है कि ले दे कर चार सौ चिट्ठाकार हैं, यही लेखक हैं, यही पाठक हैं और यही टिप्पणी कर्ता। कभी कभी मुझे लगता जैसे हम किसी जुरासिक पार्क में रहते हैं जहां रहने वालों की अपनी ही दुनिया है और बाहर की दुनिया को इसके बारे में पता ही नहीं है।

अब यह बात तय है कि बाहर की दुनिया को जब इसका पता चलेगा तो लोगों का बहुत तेजी से हमारी इस छोटी सी और प्यारी सी दुनिया में आना शुरू हो जायेगा। जब भी यह होगा तो नारद पर दबाव बढ़ जायेगा और चिट्ठाचर्चा में सभी हिंदी चिट्ठों की चर्चा करना असंभव हो जायेगा। इसका दबाव अभी से महसूस हो रहा है। पिछले दिनों बढ़्ती चोरी की घटनाये भी इस और ही इशारा करती है कि बाहर से नये लोग तेजी से यहां आ रहे हैं ।

परिचर्चा पर पुराने सदस्य जब थक हार कर बैठ गये तो नये सदस्यों ने आकर इसे फिर से गुंजायमान कर दिया है तथा परिचर्चा के सदस्यों की संख्या भी अब चार सौ को छू रही है।

पिछले दिनों हिंदी चिट्ठों को टीवी और याहू हिंदी पर स्थान मिला। मैंने कई अंग्रेजी के चिट्ठों पर भी मीडिया पर हिंदी चिट्ठों के जिक्र के बारे में पढ़ा। तो क्या दूसरी दुनिया के लोग हमारे यहां आ रहे हैं?

तो क्या जिन दिनों का हम बहुत बेसब्री से इंतजार कर रहे थे वे आ गये हैं? वर्डप्रैस पर हमें हमारे चिट्ठे पर आने वालों का पूरा हिसाब किताब मिल जाता है। पिछले दस बारह दिनों से सर्च इंजिन से सर्च करते हुए आईना पर आने वालों की संख्या में अप्रत्याशित वृद्धी हुई है। बहुत बड़ी संख्या में लोग hindiyahoo, narad, akshargram, hindiblog, hindinewspaper सर्च करते हुए आरहे हैं। लोग हिंदी में भी सर्च कर रहे हैं जिनमें मेरे यहां आने वाले प्रमुख रूप से सर्च कर रहे थे – हिंदी, साहित्य, समाचार, फिल्म, अमिताभ, साफ्टवेयर, समाज, गुरू आदि।

अभी नारद पर प्रविष्टियों पर लगने वाले हिट्स की संख्या दिखायी जाने लगी है मगर जब मैंने पिछले एक सप्ताह में लगने वाले हिट्स का जायजा लिया तो चौंका देने वाले नतीजे मिले। बहुसंख्या में हिट्स नारद के अलावा भी मिल रहे हैं। पिछले एक सप्ताह में मिले कुल पेजलोड्स में से आईना पर औसतन 12% लोग ही नारद से हिट करके आये। पहली बार देख कर मुझे भी विश्वास नहीं हुआ। तो क्या वो आ रहे हैं? आप क्या कहते हैं?

  1. फ़रवरी 17, 2007 को 10:37 अपराह्न पर | #1

    मैने काफी ध्यान से देखा है,
    हमारे चिट्ठों पर आने वाले, गूगल से काफी संख्या मे आते है।

    मेरे पास पूरा रिकार्ड है, और मै समय समय पर इसका विश्लेषण भी करता रहता है। बस आप इतना समझ लीजिए, कई कई लोग/संस्थाएं गुपचुप रुप से हिन्दी चिट्ठों पर नज़र रख रही है। अब इनके इरादे क्या है, ये तो वही लोग जाने, लेकिन ये लोग कौन है, यह मै जरुर जानता हूँ।

    बाकी जानकारी फिर कभी, अकेले में।

  2. फ़रवरी 17, 2007 को 11:00 अपराह्न पर | #2

    बहुत पहले किसी ने एक पोस्ट लिखी थीम “सावधान ब्लॉगिए आ रहे हैं” लगता है अब लिखना पढ़ेगा “सावधान पाठक आ रहे हैं”

    मेरे चिट्ठे पर गूगल से आने वाला पहला व्यक्ति dataone सर्च करते हुए आया था तो मुझे यकीन नहीं हुआ था। अब कई बार तो बड़ी ही रुचिकर बातें पता लगती हैं इससे।

    बाकी रही बात कि लोग गुपचुप आते हैं तो इस बारे में अपना अनुभव बताऊंगा। शुरु में जो आदमी हिन्दी चिट्ठों पर आता है वो मंत्रमुग्ध सा बस चिट्ठों को पढ़ता ही जाता है। कई बार हमारे उसे पता ही नहीं चलता कि कमेंट कहाँ कैसे करना है।

    हिन्दी ब्लॉगिंग के प्रचार हेतु हमें कुछ नए तरीके अपनाने होंगे, जिसके बारे में काफी समय से लिखने की सोच रहा हूँ।

    बाकी जानकारी फिर कभी, अकेले में।

    ऐसी क्या बात है जी जो बिरादरी के सामने नहीं हो सकती। :)

  3. फ़रवरी 17, 2007 को 11:05 अपराह्न पर | #3

    यह आने वालों की बढ़ी हुई संख्या इस बात की गवाह है कि आप जीत रहे हो. मिठाई बटवा दो, अब तो!! हमारी ओर से अग्रिम बधाई :)

  4. फ़रवरी 18, 2007 को 1:39 अपराह्न पर | #4

    जगदीश जी, पिछले कुछ दिनों से तो मै भी हैरान हूँ!! आपका तो खैर ठीक है ,आपके लेख बेहतरीन होते हैं! लेकिन मेरा चिट्ठा भी अब तक टाॉप १०० मे ३ बार आया है!

  5. फ़रवरी 18, 2007 को 3:47 अपराह्न पर | #5

    सावधान कि वे आ रहे हैं।।।
    अपनों में से ही कई भेदिए हैं ……..खुद वे ऐसा बता रहे हैं
    पर क्‍यों वे हमें डरा रहे हैं
    क्‍या है अपने पास लुटने के लिए……..हम क्‍या छिपा रहे हैं

  6. फ़रवरी 18, 2007 को 4:25 अपराह्न पर | #6

    @masijeevi
    डरा नहीं रहे खुशी से चिल्ला रहे हैं :)

  1. अप्रैल 2, 2007 को 10:40 पूर्वाह्न पर | #1

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