आखिरकार हम सब का विरोध रंग लाया।
रीडिफ ने आकर्ष मेहरोत्रा का ब्लाग हटा दिया है।
सभी चिट्ठाकारों का में दिल से धन्यवाद कहना चाहता हूं जिनके सहयोग से यह सब हुआ।
रीडिफ्लैंड के संदीप जी को भी उनके सहयोग के लिये धन्यवाद देना चाहता हूं।

यह ठीक है कि हम लोग चिट्ठाकारिता धनार्जन के लिये नहीं करते। यह भी सच है कि एक बार जो लोगों को लिख कर दे दिया वो उनका हो गया| मेरे कई लेखों के लिंक लोगों ने अपने ब्लाग पर दिये हैं। मेरे कई लेख भी मेरे ही नाम से प्रकशित भी किये गये। उदाहरण के लिये यहां देखिये। मगर कोई कापी करके अपने नाम से छाप दे तो इसका विरोध होना ही चाहिये और सम्मानपूर्वक तरीके से ब्लाग लेखक को अथवा ब्लाग होस्ट को निवेदन करना चाहिये।

अधिकतर मामलों में यह तरीका काम कर जाता है।

एक बार फिर से आप सब का धन्यवाद।



12 Responses to “सफल हुई मुन्नाभाई की गांधीगिरी”  

  1. खुशी हुई। हमें लगातार सतर्क रहना चाहिए।

  2. बहुत बहुत बधाई।
    सच है। एकता मे ही शक्ति है।
    कभी कभी तो हमे अपने अधिकारों का पता ही नही होता। हम सोचते है, जो है जैसा है चलने दो। यही नीति, दूसरों को, इस तरह के अपराध करने के लिए उकसाती है।

    हमारा लेखन हमारी पहचान है, यही हमारी पूँजी है यही हमारी सम्पत्ति। भले ही आज हम यह सब शौंक के लिए लिखते हो, लेकिन यह बात नोट कर लीजिए, एक दिन आएगा, जब इसी कन्टेन्ट के लिए लोग पैसे देंगे। वो दिन तभी आएगा, जब हम अपने लेखन और अपने कन्टेन्ट की इज्जत करना सीखेंगे।

  3. सही है ।

  4. बहुत खुशी हुयी
    :)

  5. 5 संजय बेंगाणी

    खुशी की बात है. आपको बधाई.

  6. बहुत बधाई। :)

  7. एक सफ़ल शुरुआत।

  8. खुशी की बात है. एक सफ़ल शुरुआत के लिए बधाई!!!

  9. वाह ,बधाई!

  10. अत्यंत हर्ष का विषय है कि चिट्ठाकारों की एकता ने यह काम कर ही दिखाया। बधाइ आपको।

  11. आपकी मेहनत का फल आप ना खाएं तो भला कौन खाए :)

  12. एक बार फिर से आप सभी का धन्यवाद।


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