लो भई, अब मुन्नाभाई के साथ ही भाईगिरी हो गई। यानि अपने मुन्नाभाई पर भी हाथ साफ कर लिया एक ब्लागर ने। रीडिफ पर यह ब्लागर हैं इलाहाबाद के आकर्ष मेहरोत्रा। असली माल यहां है और चोरी किया गया माल यहां है। मुझे खुशी है कि मेरे लिखे को चुराने लायक मुल्यवान समझा गया।

भाई लोग सलाह दें कि इनका क्या किया जाये। मैंने वहां दिये संपर्क के लिंक पर भी आकर्ष को इसे हटा लेने के लिये लिखा है।

इस सब को रोकने के लिये हम सबको मिल कर ही कुछ करना पड़ेगा ऐसा मेरा सोचना है।

भाई आकर्ष से मेरा फिर अनुरोध है कि वे इसे वहां से फौरन हटा लें। क्योंकि न तो उन्होंने इसकी अनुमति लेना जरूरी समझा और न ही मेरा नाम लिखना जरूरी समझा जबकि मेरा इमेल पता मेरे चिट्ठे आईना पर बड़े अक्षरों में उपलब्ध है।

chorikamaal.JPG



17 Responses to “और अब मुन्नाभाई के साथ भाईगिरी”  

  1. इस तरह की बार बार होती घटनाओं पर अंकुश लगाना बहुत जरुरी है. यह ठीक बात नहीं. मेहनत कोई कर रहा है और फल खाने कोई और चला आये.

    कुछ तो तरीके होंगे इस तरह की घटनाओं को रोकने के??

  2. एक बार तो आपका चित्र भी चोरी हो गया था ना?

  3. Jagdish bhai,
    Please aap ek post likhiye detail mein,
    Aapke content ke saath, aur link deejiye with such blogger.

    Write him an email with CC to rediffiland@rediff.co.in
    describing in detail.

  4. तो आईना भी लुट ही गया !

    खैर मजाक अपनी जगह, इसके खिलाफ कुछ सीरियस किया जाना चाहिए। जिस ब्लॉगिंग सेवा पर उन महाशय का ब्लॉग है उनसे शिकायत करके कुछ फायदा होगा क्या ?

  5. @ समीर भाई,
    वाकई यह एक गंभीर मामला है, हम सब को मिल कर इसका हल खोजना होगा।

    @रवि जी,

    आपको ठीक याद है मेरा फोटो एक ब्लागर ने अपने नाम से लगा लिया था, उसका विवरण यहां है
    http://aaina2.wordpress.com/2006/06/10/blogphoto/

    @जीतू भाई,

    धन्यवाद, मैंने शिकायत भेज दी है तथा कापी आकर्ष को भी भेज दी है।

    @श्रीश जी,

    आप ठीक कह रहे हैं, कुछ हम सब को मिल कर करना होगा।
    रीडिफ को मैंने शिकायत कर दी है। याहू पर जब मेरा फोटो लगाया गया था तो मैंने याहू में शिकायत की थी तो वह ब्लाग अगले दिन से हट गया था। अब पता नहीं रीडिफ वाले उतने प्रोफेशनल हैं या नहीं?

  6. 6 राजीव

    जगदीश जी,
    बिलकुल ठीक किया आपने। ऐसे मसले को गम्भीरता से लिया जाना चाहिये और केवल लोकप्रियता / व्यावसायिकता अथवा अव्यवसायिक उद्देश्य से भी किये गये इस प्रकार के कार्यों की भर्त्सना की जानी चाहिये और यथासम्भव विरोध और कार्यवाही भी।

    ई-मेल का पता तो जीतू जी ने दे ही दिया अधिक विवरण के लिये रीडिफ के इस पन्ने का भी सन्दर्भ ले सकते हैं –
    http://www.rediffiland.com/terms.html
    क्रम सं 1, 4, 5, 6 और 10 की शर्ते विशेष रूप से ।

  7. आपने जो किया सो सही ही किया वैसे हमने अपने ब्लाग मेंआज ब्लाग चोरी रोकने के कुछ सुगम उपाय बताये हैं आप देखें और जो ठीक समझ में आये उसका उपयोग करें!

  8. सच तो ये है कि ये कॉपी पेस्ट का दौर है। बहुत दुःख हुआ आपकी मेहनत का फल कोई और खा रहा है। उम्मीद रखें rediff वाले इसके खिलाफ एक्शन ज़रूर लेंगे।

  9. बेशर्मी की हद है!

    वैसे, इतने वृहद अंतरजाल पर चोरियों का ‘ट्रैक’ रखना क्या मुमकिन होगा?

  10. 10 संजय बेंगाणी

    आगे क्या होता है, लिखते रहे. सबको जानकारी रहेगी जो आगे काम आएगी. यह सिलसिला अब जारी रहने वाला है.

  11. un ke blog par jaa kar comment to likh diya hai, Rediff par feedback bhi diya hai..aur jo kuchh hum kar sakte hain, bataiye..

  12. sabhi log us blog par comments likhiye

    But don’t use any bad language.

    Tell this guy that he’s done a mistake and he should correct it.

  13. मुझे रात रीडिफ ने पावती मेल भेज कर कहा तो कि चिंता न करें इसे जल्द चेक किया जायेगा (Not to worry, will check this asap. ).
    देखें क्या करते हैं।

  14. अब ये चोरी-चकारी की वारदात बढ़ती जा रही है. कहां कहां ढूंढते फिरेगे इन उठाईगीरों को? मेरे ख़्याल से इनको पढ़ने कोई नहीं आता होगा..

  15. यहाँ कमेंट के बजाय अगर चोरी की साईट पे आप लोगों ने कमेंट किये होते तो शायद ज्यादा असर होता, जो भी उस लेख को पढने जाता उसे पता चल जाता कि ये १००% चोरी है और इतने ज्यादा लोग पहले से ही ये बात जानते हैं।

  16. आप सभी का धन्यावाद।
    रिडिफ्लैंड ने आकर्ष का ब्लाग हटा दिया है। विस्तार से यहां देखें
    http://aaina2.wordpress.com/2007/02/05/blog-2/


  1. 1 आईना सफल हुई मुन्नाभाई की गांधीगिरी «

Leave a Reply