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	<title>Comments on: विंडोस विस्टा पर एक नजर</title>
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	<description>आईना देख कर तस्सली हुई, हमको इस घर में जानता है कोई..........! - गुलजार</description>
	<pubDate>Mon, 12 May 2008 09:19:05 +0000</pubDate>
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		<title>By: Global Voices Online &#187; Blog Archive &#187; Hindi Blogoshere: From freedom of speech to blog theft!</title>
		<link>http://aaina2.wordpress.com/2007/02/01/vista/#comment-1498</link>
		<dc:creator>Global Voices Online &#187; Blog Archive &#187; Hindi Blogoshere: From freedom of speech to blog theft!</dc:creator>
		<pubDate>Mon, 05 Feb 2007 17:21:42 +0000</pubDate>
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		<description>[...] the tech front, Jagdish on the other hand is reflecting some light on Windows Vista with his mirror. Debashish is not behind in informing us about the incompatibility problems between [...]</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>[...] the tech front, Jagdish on the other hand is reflecting some light on Windows Vista with his mirror. Debashish is not behind in informing us about the incompatibility problems between [...]</p>
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		<title>By: मनीषा</title>
		<link>http://aaina2.wordpress.com/2007/02/01/vista/#comment-1462</link>
		<dc:creator>मनीषा</dc:creator>
		<pubDate>Fri, 02 Feb 2007 05:59:04 +0000</pubDate>
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		<description>माइक्रोसोफ्ट विंडोज जो सुविधा प्रदान करता है वो अन्य OS में नहीं मिलती है। अन्य ओ एस कंप्यूटर विशेषज्ञों द्वारा कंप्यूटर विशेषज्ञों के लिये बनाये गये हैं। विंडोज आम आदमी को कंप्यूटर पर काम करने में आसानी देता है। किसी कमांड को याद करने की जरुरत नहीं होती। कोई भी सोफ्टवेयर इंस्टाल करना हो, बस क्लिक करो, नहीं तो अन्य में पहले मेक करो, इंस्टाल करो, पाथ याद रखो।

मनीषा</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>माइक्रोसोफ्ट विंडोज जो सुविधा प्रदान करता है वो अन्य OS में नहीं मिलती है। अन्य ओ एस कंप्यूटर विशेषज्ञों द्वारा कंप्यूटर विशेषज्ञों के लिये बनाये गये हैं। विंडोज आम आदमी को कंप्यूटर पर काम करने में आसानी देता है। किसी कमांड को याद करने की जरुरत नहीं होती। कोई भी सोफ्टवेयर इंस्टाल करना हो, बस क्लिक करो, नहीं तो अन्य में पहले मेक करो, इंस्टाल करो, पाथ याद रखो।</p>
<p>मनीषा</p>
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	<item>
		<title>By: SHUAIB</title>
		<link>http://aaina2.wordpress.com/2007/02/01/vista/#comment-1461</link>
		<dc:creator>SHUAIB</dc:creator>
		<pubDate>Fri, 02 Feb 2007 05:43:43 +0000</pubDate>
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		<description>&lt;b&gt;संजय भाई&lt;/b&gt; - क्या बेशर्मी की बात करते हो यार ;) काम ग्रिराफ़िक का करते हो फिर भी विंडोज़ की जय करते हो - माना कि Apple महंगा ज़रूर है मगर ग्रिराफ़िक के लिए सबसे सही सिस्टम यही तो है और ये मेरा अपना ख‌़याल है :)

&lt;b&gt;भाटिया जी,&lt;/b&gt; आपका बहुत धन्यवाद जो मुझे इतनी अच्छी जानकारी विस्तार के साथ पढ़ने को मिली।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p><b>संजय भाई</b> - क्या बेशर्मी की बात करते हो यार <img src='http://s.wordpress.com/wp-includes/images/smilies/icon_wink.gif' alt=';)' class='wp-smiley' /> काम ग्रिराफ़िक का करते हो फिर भी विंडोज़ की जय करते हो - माना कि Apple महंगा ज़रूर है मगर ग्रिराफ़िक के लिए सबसे सही सिस्टम यही तो है और ये मेरा अपना ख‌़याल है <img src='http://s.wordpress.com/wp-includes/images/smilies/icon_smile.gif' alt=':)' class='wp-smiley' /> </p>
<p><b>भाटिया जी,</b> आपका बहुत धन्यवाद जो मुझे इतनी अच्छी जानकारी विस्तार के साथ पढ़ने को मिली।</p>
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	<item>
		<title>By: संजय बेंगाणी</title>
		<link>http://aaina2.wordpress.com/2007/02/01/vista/#comment-1460</link>
		<dc:creator>संजय बेंगाणी</dc:creator>
		<pubDate>Fri, 02 Feb 2007 04:25:53 +0000</pubDate>
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		<description>हम चाह कर भी विंडोज को छोड़ नहीं सकते क्यों कि हमारे काम के सारे सॉफ्टवेर विंडोज पर ही चलते है.</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>हम चाह कर भी विंडोज को छोड़ नहीं सकते क्यों कि हमारे काम के सारे सॉफ्टवेर विंडोज पर ही चलते है.</p>
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		<title>By: रवि</title>
		<link>http://aaina2.wordpress.com/2007/02/01/vista/#comment-1459</link>
		<dc:creator>रवि</dc:creator>
		<pubDate>Fri, 02 Feb 2007 04:09:48 +0000</pubDate>
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		<description>"...सब ओपन सोर्स की बातें तो करते हैं, इस्तेमाल कोई नहीं करता (उन्मुक्त जी जैसे कुछ अपवाद हैं)। क्योंकि सब उत्पाद विंडोज के इर्द-गिर्द ही बुने गए हैं।..."

यह बात कुछ हद तक सही है. कोई भी सॉफ़्टवेयर या हार्डवेयर बहु-प्रचलित विंडोज सिस्टम के लिए बनाया जाता है. लिनक्स जैसे तंत्रों में उन्हें चलाना तो एक आम उपयोक्ता के लिए आसमान से तारे तोड़ लाने जितना कठिन होता है. इसीलिए कुछ समय तक तो विंडोज की लोकप्रियता बनी ही रहनी है. हिन्दी की बात करें तो आज भी कोई बढ़िया हिन्दी का डीटीपी सॉफ़्टवेयर नहीं है जो विंडोज छोड़ अन्य मुक्त स्रोत तंत्रों में चले!</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>&#8220;&#8230;सब ओपन सोर्स की बातें तो करते हैं, इस्तेमाल कोई नहीं करता (उन्मुक्त जी जैसे कुछ अपवाद हैं)। क्योंकि सब उत्पाद विंडोज के इर्द-गिर्द ही बुने गए हैं।&#8230;&#8221;</p>
<p>यह बात कुछ हद तक सही है. कोई भी सॉफ़्टवेयर या हार्डवेयर बहु-प्रचलित विंडोज सिस्टम के लिए बनाया जाता है. लिनक्स जैसे तंत्रों में उन्हें चलाना तो एक आम उपयोक्ता के लिए आसमान से तारे तोड़ लाने जितना कठिन होता है. इसीलिए कुछ समय तक तो विंडोज की लोकप्रियता बनी ही रहनी है. हिन्दी की बात करें तो आज भी कोई बढ़िया हिन्दी का डीटीपी सॉफ़्टवेयर नहीं है जो विंडोज छोड़ अन्य मुक्त स्रोत तंत्रों में चले!</p>
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	<item>
		<title>By: उन्मुक्त</title>
		<link>http://aaina2.wordpress.com/2007/02/01/vista/#comment-1458</link>
		<dc:creator>उन्मुक्त</dc:creator>
		<pubDate>Fri, 02 Feb 2007 01:44:37 +0000</pubDate>
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		<description>मेरा अपना अनुभव है कि कंप्यूटर से संबन्धित लोग ओपेन सोर्स की वकालत न कर विंडोस़ की वकालत इसलिये करते हैं क्योंकि वे विंडोस़ को ही जानते हैं पर ओपेन सोर्स को नहीं। जैसे ओपेन सोर्स का प्रयोग स्कूल तथा कॉलेज  स्तर पर बढ़ेगा यह ज्यादा लोकप्रिय होगा और कंप्यूटर से संबन्धित लोग इसकी वकालत करेंगे। ओपेन सोर्स का सबसे अच्छा पक्ष है, इसमें बौद्धिक सम्पदा अधिकारों के झंझट का न होना। 
दूसरी बात कॉपीराईट के उल्लंघन  की है। हम यह भी देखें  किि कितने लोग हैं जो कि विंडोस़ का प्रयोग करते हैं पर  कॉपीराईट के उल्लंघन नहीं करते। भारतवर्ष में शायद ही कोई इसका अपवाद हो। यहां तक की सरकारी ऑफिस में भी इसका खुला उल्लंघन होता है। यदि लोग कानून में ज्यादा विश्वास करें, आत्म विश्वास रखें तो ओपेन सोर्स का प्रयोग बढ़ेगा। 
२०१० के दशक में देखने की बात रहेगी कि किसका परला भारी रहता है:  ओपेन सोर्स का या मालिकाना सॉफ्टवेर का।  हिन्दी में इस तरह के लेख यह इशारा कर रहें हैं  कि ओपेन सोर्स का महत्व बढ़ रहा है।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>मेरा अपना अनुभव है कि कंप्यूटर से संबन्धित लोग ओपेन सोर्स की वकालत न कर विंडोस़ की वकालत इसलिये करते हैं क्योंकि वे विंडोस़ को ही जानते हैं पर ओपेन सोर्स को नहीं। जैसे ओपेन सोर्स का प्रयोग स्कूल तथा कॉलेज  स्तर पर बढ़ेगा यह ज्यादा लोकप्रिय होगा और कंप्यूटर से संबन्धित लोग इसकी वकालत करेंगे। ओपेन सोर्स का सबसे अच्छा पक्ष है, इसमें बौद्धिक सम्पदा अधिकारों के झंझट का न होना।<br />
दूसरी बात कॉपीराईट के उल्लंघन  की है। हम यह भी देखें  किि कितने लोग हैं जो कि विंडोस़ का प्रयोग करते हैं पर  कॉपीराईट के उल्लंघन नहीं करते। भारतवर्ष में शायद ही कोई इसका अपवाद हो। यहां तक की सरकारी ऑफिस में भी इसका खुला उल्लंघन होता है। यदि लोग कानून में ज्यादा विश्वास करें, आत्म विश्वास रखें तो ओपेन सोर्स का प्रयोग बढ़ेगा।<br />
२०१० के दशक में देखने की बात रहेगी कि किसका परला भारी रहता है:  ओपेन सोर्स का या मालिकाना सॉफ्टवेर का।  हिन्दी में इस तरह के लेख यह इशारा कर रहें हैं  कि ओपेन सोर्स का महत्व बढ़ रहा है।</p>
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	</item>
	<item>
		<title>By: Shrish</title>
		<link>http://aaina2.wordpress.com/2007/02/01/vista/#comment-1457</link>
		<dc:creator>Shrish</dc:creator>
		<pubDate>Thu, 01 Feb 2007 18:00:57 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://aaina2.wordpress.com/2007/02/01/vista/#comment-1457</guid>
		<description>जैसा कि संजय जी ने कहा एक तो यह महंगा है, दूसरा इसकी हार्डवेयर रिक्वायरमेंट बहुत ज्यादा है। अपने कम्प्यूटर में तो अपग्रेड के विनचल नहीं सकता।

क्षितिज जी ने पहली लाइन में बहुत ही सही बात कही है। सब ओपन सोर्स की बातें तो करते हैं, इस्तेमाल कोई नहीं करता (उन्मुक्त जी जैसे कुछ अपवाद हैं)। क्योंकि सब उत्पाद विंडोज के इर्द-गिर्द ही बुने गए हैं।

जगदीश जी ने भी ठीक कहा। लेकिन डबल खुशी की बात ये है कि अखबारों अब म्प्यूटर संबंधी ढंग के लेख लिखे जाने लगे हैं। पहले तो ऐसे लेखों के नाम पर बकवास छापी होती थी।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>जैसा कि संजय जी ने कहा एक तो यह महंगा है, दूसरा इसकी हार्डवेयर रिक्वायरमेंट बहुत ज्यादा है। अपने कम्प्यूटर में तो अपग्रेड के विनचल नहीं सकता।</p>
<p>क्षितिज जी ने पहली लाइन में बहुत ही सही बात कही है। सब ओपन सोर्स की बातें तो करते हैं, इस्तेमाल कोई नहीं करता (उन्मुक्त जी जैसे कुछ अपवाद हैं)। क्योंकि सब उत्पाद विंडोज के इर्द-गिर्द ही बुने गए हैं।</p>
<p>जगदीश जी ने भी ठीक कहा। लेकिन डबल खुशी की बात ये है कि अखबारों अब म्प्यूटर संबंधी ढंग के लेख लिखे जाने लगे हैं। पहले तो ऐसे लेखों के नाम पर बकवास छापी होती थी।</p>
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	</item>
	<item>
		<title>By: जगदीश भाटिया</title>
		<link>http://aaina2.wordpress.com/2007/02/01/vista/#comment-1456</link>
		<dc:creator>जगदीश भाटिया</dc:creator>
		<pubDate>Thu, 01 Feb 2007 16:20:57 +0000</pubDate>
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		<description>मगर क्षितिज जी, 
खुशी की बात यह है कि हिंदी में इस प्रकार के लेख लिखे जा रहे हैं। 

</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>मगर क्षितिज जी,<br />
खुशी की बात यह है कि हिंदी में इस प्रकार के लेख लिखे जा रहे हैं।</p>
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	<item>
		<title>By: क्षितिज कुलश्रेष्ठ</title>
		<link>http://aaina2.wordpress.com/2007/02/01/vista/#comment-1455</link>
		<dc:creator>क्षितिज कुलश्रेष्ठ</dc:creator>
		<pubDate>Thu, 01 Feb 2007 15:32:09 +0000</pubDate>
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		<description>ओपन सोर्स और लिनक्स का गुणगान करना और माइक्रोसॉफ्ट की खिंचाई करना आज कल ऐसा फैशन हो गया है कि जो यह न करे वह कंप्यूटर की दुनिया में नीची नज़र से देखा जाता है। तो अखबार भी यही करेंगे। अब असलियत यह है कि कोई भी पर्सनल कंप्यूटर बेचने वाली कंपनी, एप्पल को छोड़ कर, अपने कंप्यूटर में विंडोज ही इस्तेमाल करने की हिदायत देते है, और पहले से ही इंस्टाल कर के बेचते हैं। एप्पल का अपना मैक.ओ.एस.एक्स अलग ही है। कोई भी कंपनी अपने उत्पाद पर ओपन सोर्स सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करने की राय नहीं देती। अंतरजाल पर भी अधिकतर नई सेवाएं जैसे विडियो ऑन डिमांड या स्ट्रीमिंग मीडिया ओपन सोर्स को ध्यान में रख कर नहीं बनाई जा रहीं। तो ऐसे माहौल में जब तक कि पेटेंट और कॉपीराइट या पाइरेसी का बहाना बना कर कंपनियां माइक्रोसॉफ्ट का पलड़ा भारी किये हुए हैं, ओपन सोर्स की मुंह ज़बानी हिमायत करते रहने से कितना फर्क पड़ेगा? इस संदर्भ में डिजिटल राइट्स मैनेजमेंट पर चल रही बहस और सोनी तथा एप्पल के द्वारा किए गए प्रयत्न और अमेरिका का डी.एम.सी.ए. कानून महत्वपूर्ण हैं।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>ओपन सोर्स और लिनक्स का गुणगान करना और माइक्रोसॉफ्ट की खिंचाई करना आज कल ऐसा फैशन हो गया है कि जो यह न करे वह कंप्यूटर की दुनिया में नीची नज़र से देखा जाता है। तो अखबार भी यही करेंगे। अब असलियत यह है कि कोई भी पर्सनल कंप्यूटर बेचने वाली कंपनी, एप्पल को छोड़ कर, अपने कंप्यूटर में विंडोज ही इस्तेमाल करने की हिदायत देते है, और पहले से ही इंस्टाल कर के बेचते हैं। एप्पल का अपना मैक.ओ.एस.एक्स अलग ही है। कोई भी कंपनी अपने उत्पाद पर ओपन सोर्स सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करने की राय नहीं देती। अंतरजाल पर भी अधिकतर नई सेवाएं जैसे विडियो ऑन डिमांड या स्ट्रीमिंग मीडिया ओपन सोर्स को ध्यान में रख कर नहीं बनाई जा रहीं। तो ऐसे माहौल में जब तक कि पेटेंट और कॉपीराइट या पाइरेसी का बहाना बना कर कंपनियां माइक्रोसॉफ्ट का पलड़ा भारी किये हुए हैं, ओपन सोर्स की मुंह ज़बानी हिमायत करते रहने से कितना फर्क पड़ेगा? इस संदर्भ में डिजिटल राइट्स मैनेजमेंट पर चल रही बहस और सोनी तथा एप्पल के द्वारा किए गए प्रयत्न और अमेरिका का डी.एम.सी.ए. कानून महत्वपूर्ण हैं।</p>
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	<item>
		<title>By: संजय बेंगाणी</title>
		<link>http://aaina2.wordpress.com/2007/02/01/vista/#comment-1454</link>
		<dc:creator>संजय बेंगाणी</dc:creator>
		<pubDate>Thu, 01 Feb 2007 14:57:56 +0000</pubDate>
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		<description>है भी महंगा!</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>है भी महंगा!</p>
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