पुनर्जन्म हो यदि मेरा !
06Jan07
आपने अमिताभ जी को उत्तरप्रदेश के लिये एक विज्ञापन में बोलते हुए देखा होगा। यदि यही विज्ञापन उन बच्चों में से कोई बोलता जो नोएडा के निठारी गांव में दरिंदों द्वारा मारे गये तो शायद कुछ यूं बोलता:
पुनर्जन्म हो यदि मेरा
न कभी हो यमुना के तट पर
नोएडा शहर की माटी पर
हड्डियां दबी हैं सड़कों पर
जान के दुश्मन लपक पड़े
काम पे जाते लड़कों पर
पढ़ने जाती हर लड़की पर
निठारी के आंगन और खिड़की पर
हड्डियां नाली और सीवरों पर
बच्चों के बिकते लिवरों पर
कितनों का आंगन उजड़ गया
एक काला सूरज निगल गया
पुनर्जन्म हो यदि मेरा
न कभी हो यमुना के तट पर





सच्चाई को बहुत अच्छी तरह से उकेरा है आपने कविता के माध्यम से
बधाई
अमिताभ बच्चन को इस प्रचार में देख कर और उत्तर प्रदेश की हालत देख कर शर्म आती है। प्रशासन के लिए पैसा है नहीं और अमिताभ बच्चन को इस प्रचार के लिए देने के लिए करोड़ों रुपए हैं। भ्रष्टाचार की असीम पराकाष्ठा है उत्तर प्रदेश।
इस गीत का नोयडाकरण बहुत जीवंत किया है जगदीश भाई. बधाई.
सदी के महानायक जो न करें!
बहुत बढ़िया। इसी माध्यम का नाम है ब्लॉग।
बहुत बढिया!! उत्तर प्रदेश अब निरुत्तर हो गया है
बहुत ही विचलित कर देने वाली घटना है, कभी कभी मानव होने पर ही शर्म आने लगती है.
आपने अपनी भावनाओं को बखुबी व्यक्त किया है.
बहुत अच्छा लिखा भाटियाजी… वाह
कभी कभार लगता है अमिताभ अब अमर सिंह और मुलायम की कठपुतली बन गये हैं। अब इस विज्ञापन में काम करने के बाद तो यह पक्का लगता है!
शर्म शर्म, मुलायम, अमर और अमिताभ
काव्य का सटिक प्रयोग.
एक शर्मसार कर देने वाली घटना पर आप द्वारा किया गया काव्यात्मक प्रहार सराहनिय है. लिखते रहें.
तारीफ के लिये आप सभी का बहुत बहुत धन्यवाद।
ऐसी कौन सी धरती है आईना जी, जहां कोई बच्चा पैदा होगा, तो इस निश्चितता के साथ, कि उस के साथ इस तरह का वाकया नही होगा, और हिन्दुस्तान में ऐसी कौन सी पुलिस है, जो आसानी से, बिना घूंस खाये, गरीब की रपट लिख लेगी?
अकेले उत्तर प्रदेश को गाली दे कर क्या होगा?
बच्चों के साथ जो हो रहा है उत्तर भारत में तो लगता है सभी यही कहेंगे
पुनर्जन्म हो यदि मेरा
न कभी हो उत्तर भारत में
६-७ लाईन में ही आपने बहुत कुछ कह दिया
निठारी कांड पर आक्रोश व्यक्त करने के लिये शब्द नही है मेरे पास
बेहद पीडादायक घटना को आपने बखूबी कहा है..
Aape bahut hi acha likha kasam se hriday ko chu gayi aapki yeh marmik kavita