पिछले दिनों मैं एक प्रतिभाशाली सुअर से गुड़गांव में मिलासमीर भाई ने उस सुअर की प्रतिभा को पहचाना और सिफारिश कर डाली कि उसे मंत्री पद दे दिया जाये। हाइटेक गुड़गांव में रहने वाले इस सुअर ने यह सब जान लिया और ठान लिया कि मंत्री बनने की कोशिश की जानी चाहिये। इसी दिशा में उसका लिखा एक पत्र हमारे हाथ लग गया और इस खत को यहां ज्यों का त्यों पेश किया जा रहा है।

पीएम जी,
नमस्कार,

मुझे पता चला है कि आपके पास मंत्री की कुछ पोस्ट खाली हैं, मैं स्वंय को देश सेवा के लिये इस स्थान के लिये प्रस्तुत करना चाहता हूं।
इस पोस्ट के लिये मेरी उम्मीदवारी सर्वश्रेष्ठ हो सकती है क्योंकि एक मंत्री की नियुक्ति के लिये जो भी निर्धारित योग्यताएं होनी चाहियें, मैं उस सब से परिपूर्ण हूं। अपने समर्थन में मैं कुछ तर्क नीचे दे रहा हूं:

१. दबे कुचलों का प्रतिनिधी : समाज के दबे कुचलों को प्रतिनिधित्व देने के लिये मुझसे अच्छा उम्मीदवार कोई नहीं हो सकता। भला मुझसे ज्यादा दबा कुचला और कौन हो सकता है?
२. वादनिरपेक्ष : आपको बता दूं कि मैं पिछले कई वर्षों से गुड़गांव के आलिशान उद्योगों, उनके भवनों के आसपास रहा हूं और वहां के बड़े बड़े पूंजीवादी गढ़ों के बारे में अच्छा तर्जुबा ले चुका हूं और वहां का ढेरों हाईटेक कूड़ा खाया है। साथ ही समाज का सबसे दबा कुचला प्राणी होने के कारण समाजवाद का भी प्रधिनिधित्व करुंगा। इससे यह फायदा होगा कि गंगा गये तो गंगा दास और जमुना गये तो जमुना दास, और साथ ही वादनिरपेक्ष छवि भी।
३. धर्मनिरपेक्ष : असल में हमारे में कोइ धर्म वगैरह का लफड़ा ही नहीं होता। मैं तो हिन्दू मुसलमानों के मोहल्ले में पड़े कूड़े को बिना किसी राग द्वेष या जातीय-सामुदायिक संकीर्णता के हजम कर जाता हूं ।
४. प्रवासी भारतीयों में लोकप्रिय: प्रवासी भारतीयों में तो मैं इतना लोकप्रिय हूं कि वास्तव में मुझे मंत्री बनाये जाने का प्रस्ताव वहीं से आया।
५. ब्लागरों पर भी असर: समाज में विचारों का प्रवाह आजकल ब्लागस पर ही होता है इसलिये ब्लागरों की मांगों को नजरांदाज नहीं किया जा सकता। मेरी उम्मीदवारी की इच्छा इन ब्लाग्स पर ही पैदा हुई।
६. ईमानदार और बेदाग: आपका कोइ मंत्री कभी तेल के खेल में लिप्त मिलता है तो कोइ अपने ही सचिव का हत्यारा। इन लोगों की वजह से आपकी छवि भी खराब हुई है। मेरी छवि ईमानदार और बेदाग है। मुझे मंत्री बनाये जाने से आपकी छवि में भी निखार आयेगा।
७. जानवर प्रेम का संदेश: मुझे मंत्री बना कर आप जानवर प्रेमी होने का संदेश दे पायेंगे। इससे पशु प्रेमी खेमका जी जैसे कुछ सांसद भी आपके गठबंधन को ज्वाइन कर सकते हैं, इससे आपका गठबंधन और भी मजबूत होगा।

आपसे सकारात्मक जवाब के इंतजार में
आपका
एक सुअर
गुड़गांव

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12 Responses to “पीएम को एक सुअर की चिट्ठी”  

  1. 1 समीर लाल


    प्रवासी भारतीयों में तो मैं इतना लोकप्रिय हूं कि वास्तव में मुझे मंत्री बनाये जाने का प्रस्ताव वहीं से आया।

    -ऐसा लग रहा है कि तैयारी पहले से ही पूरी कर रखी थी, बस प्रस्ताव का इंतजार था. जैसे ही प्रस्ताव आया, तुरंत अर्जी लगा दी. जरुर सफल मंत्री बनेगा!!! :)

  2. 2 ghughutibasuti

    भाई मेरे,बेचारे सूँअर को तो बख्श दो।उस बेचारे ने किसी का क्या बिगाड़ा है? इस देश के वासी तो कचरा फैलाओ अभियान में लगे हैं, एक बेचारा यही तो सफ़ाई में लगा है।इसे भी भ्रष्ट बना दोगे तो क्या होगा देश का?
    इसकी भी मलाई खाने की भूख जागेगी, और एक बार यह राजनीति में आया तो इतना कचरा फैलायेगा कि देश पूरा का पूरा कचरामय हो जायेगा।फिर साफ़ करने वाला भी कोई ना मिलेगा, सो सोच लो।
    प्यारे सूँअर इन लोगों की बातों में ना आना मेरे भाई।तुम निष्काम भाव से अपने काम में लगे रहो।
    सूँअर स्नेही,
    घुघुति बासूति

    नोट : ऐसे ही तो सदियों से हम काम करने वालों को बहलाते रहें हैं और अपना उल्लू सीधा करते रहे हैं।

  3. 3 Shrish

    @ घुघुति बासूति,
    एईसा ना बोलो भाई, कल को ऊ मंतरी बन गया तो। हमरी शुभकामनाएं सुअर जी को। बल्कि हम तो कहता हूँ कि संसद में १० % सीटें सुअरों के लिए रिजर्व हों आखिर ये नेता लोगन भी तो इंसानी खाल मा …

  4. 4 अनुराग श्रीवास्तव

    “मुझे मंत्री बनाये जाने से आपकी छवि में भी निखार आयेगा।”

    लेकिन मंत्री पद मिलने से बेचारे सुअर की छवि धूमिल हो जायेगी।

    बहुत अच्छा लिखा है - बधाई स्वीकारें!

  5. 5 pankaj बेंगाणी

    भाटियाजी संसद में 500 से ऊपर तो अभी से भरे पडे हैं…. अब जगह कहाँ है?

  6. 6 रवि

    आह! वाह!! बढ़िया व्यंग्य :)

  7. 7 SHUAIB

    भाटिया जी, मेरा भी यही कहना है कि कम से कम सुअर को बख्श देते क्योंकि सुअरों मे इस मंत्री के गूण नही होते। वैसे बढिया लेख है - बधाई

  8. 8 PRABHAT TANDON

    pankaj बेंगाणी कहिन
    “भाटियाजी संसद में 500 से ऊपर तो अभी से भरे पडे हैं…. अब जगह कहाँ है?”
    मै पंकज की बात से सहमत हूं। अब जब संसद मे जगह नही है तो इनको निगमों के अध्यक्ष ही बना दो आखिर वहां भी तो एक से बढकर एक सूअर हैं।

  9. 9 जीतू

    सुअर भाई,
    बाकी सब बाते सही है, लेकिन परेशानी है कि रिश्तेदारी निकालनी पड़ेगी, किसी मंत्री से।
    दूसरा थोड़ा साफ़-सफ़ाई से रहा करो यार!
    आखिरी, लेकिन महत्वपूर्ण, तुम्हारी ये अच्छाईयां, हमारे लिए बुराईयाँ है यार! इत्ते अच्छे लोगों के लिए राजनीति सही जगह नही, तुम जहाँ हो वहाँ सही हो, काहे गन्द मे आकर गिर रहे हो।
    भवदीय
    प्र.म.कार्यालय

  10. 10 bhuvnesh

    वाह बहुत अच्छा व्यँग्य है भटियाजी

  11. 11 सागर चन्द नाहर

    मजा आ गया भाई भाई साहब,
    क्या बात है, आजकल सारे चिठ्ठाकारों का पशु प्रेम बहुत जाग्रत हो रहा है :) पहले सुंदरी भैंस के लिये सारे दुखी दिखे अब सुअर को मंत्री बनाने के सिफ़ारिश……………

  12. 12 ratna

    मेनका जी उसे टिकट देने को राज़ी है। सूअर की प्रतिक्रिया का इन्तज़ार है।