आपको याद होगा जब एनडीटीवी ने अपनी साईट पर ब्लाग शुरू किये थे तो हमने अपनी ब्लाग बनाने की कोशिश की थी मगर हर पोस्ट वहां जांचने के बाद ही प्रकाशित की जाती थी।
आज जब अचानक वहां पहुंचे तो देख कर हैरान रह गये कि वहां क्या चल रहा है ! बहुत ही भद्दी, अशलील और नफरत फैलाने वाली टिप्पणियां देख मैं दंग ही रह गया। पता चला कि वहां टिप्पणियों पर किसी का नियंत्रण नहीं है, न तो एनडीटीवी का और न जिसका ब्लाग है उसका, तो चल रहा है खुल्ला खेल फर्रुखाबादी….!!

मुझे एक बात समझ नहीं आती कि जब हम अपना नाम छुपा सकने के लिये आजाद होते हैं तो इतने घटिया क्यों बन जाते हैं। हमारा असली रूप क्या है? वो जो हमारी पहचान के साथ एक सभ्य रूप है या वो जहां हम अनजाने हैं और अपनी असली वाली पर आ जाते हैं?



7 Responses to “ये है एनडीटीवी और आप देख रहे हैं……….?”  

  1. अपना ब्लॉग भी तो है वहां उस्ताद.. देखा कि नहीं?
    हिन्दी ब्लॉगजगत में अनामिकता की बीमारी नहीं आई है. वैसे अनाम रहकर अच्छा काम होता हो तो कर लेना चाहिए. इधर तो कई लोग छुपे रुस्तम बनकर रचनाधर्मिता में भिड़े हुए हैं. आपकी चिंता पर तो लंबी बहस होनी चाहिए. जिसके मूल में इंसानी फ़ितरत नज़र आती है. :)

  2. बिना पूरा होमवर्क किये हुये NDTV वालों ने ब्लॉगिंग और टिप्पणियों की सुविधा दे दी ।

  3. नीरज भाई, वहां तो सर्च का भी कोइ जुगाड़ नहीं है, लिंक देदें तो पता चले।

  4. बहुत ही शर्मनाक टिप्पणियां हैं वहां। और इसके ज़िम्मेदार एनडीटीवी वाले ही हैं। बहुत पहले जब मैं वहां रिजस्टर हुआ तो पता चला कि हमारी पोस्ट को संसर करके छापा जाता है, और उसके बाद आपकी ये पोस्ट पढ कर पहली बार गया।
    ज़रूरत है कि इस विषय पर खूब चर्चा हो (नीरज भाई आप भी तवज्जह दें)

  5. आप के सवाल पर बहुत देर सोचा. पता नहीं हमारा “असली” रूप क्या है… शायद कोइ एक अस्ली रूप है ही नहीं… बुरा भी उतना ही हमारा हिस्सा है, जितना भला…?

  6. मैने तो आज पहली बार देखा इनका ब्लाग का तामझाम आपके लिंक से..विचारणीय..हम्म्म्म…

  7. आपका सवाल बहुत intuitive है।

    मुझे लगता है कि बुरी बाते और बुरा सोच सभी के व्यक्तित्व का हिस्सा है। हिम्मत यही है कि हम अपने बुरे रूप को भी अपना ही नाम दें, इस से अपने बारे में और जानने को मिलता है, अपनी कम्ज़ोरी जानने को मिलती है और इसी में व्यक्तित्व की प्रगती है।

    जिन लोगों के पास अपना कम्ज़ोर रूप दिखाने की, अपना ignorance और weaknesses दिखाने की और consequences face करने की हिम्मत नहीं है वे दुनिया से तो छुपा सकते है, अन्जान रह के, लेकिन अपने conscience से भला कैसे छुपाए? और अगर छुपे भी तो ऐसे लोगों पर चर्चा ही कैसा, जिन्हें खुद से अन्जान रहना ही पसंद है?

    बदनाम होंगे मगर हम तो हम तो हम है…..


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