Home > देश, राजनीति, हिंदी, Fun, Hindi, India, Politics > माया मिली न राम- शब्दशः

माया मिली न राम- शब्दशः

एक पुराना चुटकुला है, आप लोगों ने भी सुन रखा होगा:
एक आईसक्रीम बेचने वाले के पड़ोस में मृत्यू हो गई। पड़ोसी होने के नाते यह भी गये और अर्थी को कांधा देने को जैसे ही उठाया इनके मूंह से निकल पड़ा “आईसक्रीSSSSSम ठंडी मलाई आईसक्रीSSSSSम”
पुरानी आदतें मुशकिल से जाती हैं। आगरा के फतेहाबाद में बीजेपी के विधायक छोटे लाल वर्मा को बीजेपी में अपना भविष्य डूबता दिखा तो मायावती का दामन थाम लिया। अगले चुनावों के लिये टिकट भी पक्का हो गया था। मगर हाय री किस्मत!!!!!
नई पार्टी के लिये मुसलमानों के एक सम्मेलन में भाषण देने पंहुचे, बहुत ही जोशीला भाषण दिया, मगर आदत कैसे जाती, अंत में मुंह से जोर से निकला “जय श्री राम।” अब विधायक जी बीजेपी और बीएसपी दोनों से बाहर हैं। माया मिली न राम- शब्दशः| पूरा समचार यहां देखें।

 

राजनीति पर अन्य लेख

चुनने को है क्या?
माया मिली न राम- शब्दशः
दिल में वंदेमातरम दिमाग में तेलगी
मेरा मन धक से रह जाता है…….
कृष्णा टु सुदामा “थैंक्यू बड्डी, वैरी टेस्टी सत्तू”-२
पीएम को एक सुअर की चिट्ठी
मूषकर जी का इंटरव्यू

  1. Sindhu
    सितम्बर 13, 2006 को 8:51 अपराह्न पर | #1

    नया look बहोत बहोत अच्छा लगा!!!! बहुत खूब।

  2. सितम्बर 13, 2006 को 11:00 अपराह्न पर | #2

    भई वाह वाह वाह.. क्या धांसू ख़बर है. मज़ा आ गया. आइसक्रीम ले लो वाली बात ने तो बांस कर दिया रे. बहुत बहुत धन्यवाद.

  3. सितम्बर 14, 2006 को 9:05 पूर्वाह्न पर | #3

    कौआ चला हंस की चाल…
    अच्छा सबक मिला.
    चिट्ठे का नया आवरण अच्छा लग रहा हैं.

  4. सितम्बर 14, 2006 को 4:52 अपराह्न पर | #4

    ये आइस क्रीम वाला चुटकुला पहले कभी सुना नही था – और आपने खबर पर बहुत खूब आइस मलाई मारी है – सच्ची मज़ेदार है :)
    अब तो आपका चिट्ठा पढने मे बहुत आसानी है – पहले फांट साइज़ बहुत छोटा था। लगे रहो भाई

  5. सितम्बर 14, 2006 को 9:03 अपराह्न पर | #5

    मजा आ गया!
    कुछ ऐसा ही गुजरात मैं हुआ था जब वरूण गाँधी भाजपा के चुनाव प्रचार में आये और अपने भाषण के दौरान जम कर स्थानीय विधायक पर बरसे लोगों से कहा आप पूछिये अपने अपने विधायक से कि क्यों यहाँ सड़कें खराब है? आदि …शायद वरूण को यह ध्यान नहीं रहा कि स्थानीय विधायक भाजपा के ही है। मंच पर बैठे विधायक महोदय की हालत खराब!!

  6. सितम्बर 14, 2006 को 9:45 अपराह्न पर | #6

    बहुत बढ़िया. क्या धांसू खबर निकाल निकाल कर लाते हो, भाई.
    चिठ्ठा नये आवरण मे और सुंदर दिख रहा है.

  7. राजीव
    सितम्बर 15, 2006 को 12:48 पूर्वाह्न पर | #7

    भाई वाह! बहुत मज़ेदार खबर है और सच कहूँ तो इसका शीर्षक – वह तो और भी मज़ेदार है जो कि इस समाचार पर बिल्कुल (शत-प्रतिशत) सटीक बैठता है, कड़ी में प्रकाशित मूल समाचार के शीर्षक से कहीँ अधिक सटीक ।

  8. सितम्बर 15, 2006 को 5:06 अपराह्न पर | #8

    नया चेहरा बढिया है । आँखों को भला लग रहा है :-)

  9. सितम्बर 15, 2006 को 8:50 अपराह्न पर | #9

    आप की सब से बढिया बात यही है… कहां की बात निकाल्ते हैं और उस का तार कहीन और जा कर ऐसे सहजता से मिला देते हैं के मज़ा आ जाता है!

  10. सितम्बर 15, 2006 को 10:23 अपराह्न पर | #10

    तारीफ के लिये आप सब का धन्यवाद।
    चिट्ठे का आवरण पसंद करने के लिये भी धन्यवाद।

  11. अप्रैल 29, 2007 को 6:22 पूर्वाह्न पर | #11

    accha joke tha aur kafi kuch sach bhi

  1. दिसम्बर 28, 2006 को 7:58 अपराह्न पर | #1
  2. अप्रैल 11, 2007 को 8:30 अपराह्न पर | #2
  3. मई 18, 2007 को 9:44 पूर्वाह्न पर | #3

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Connecting to %s

Follow

Get every new post delivered to your Inbox.