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क्या इतनी सिंपल सी बात गोवरंमेंट को समझ नहीं आती?

मेरी आठवीं में पढ़ने वाली बेटी ने आज पढ़ते पढ़ते अचानक पूछ लिया:

“पापा, एक छोटा सा फ्लैट बनाने में कितनी लागत आयेगी?”

“यही कोई दॊ लाख रुपये, क्यों?”

“क्या गोवरंमेंट के पास इतने पैसे नहीं होते कि स्लम में रहने वाले सब लोगों को एक छोटा सा फ्लैट ही बना कर दे दे?”

शायद वो अपने सामाजिक विज्ञान की किताब से कोई पाठ पढ़ रही थी जिसमें शहरों में झुग्गी झोपड़ी की समस्या का जिक्र था।

“बात इतनी आसान नहीं है बेटा, मैं कल ही समाचर पत्र में पढ़ रहा था कि औसतन प्रतिदिन दिल्ली में एक हजार लोग दूसरे राज्यों से यहां बसने के लिये आ जाते हैं, सरकार इस सब को बढ़ावा कैसे दे सकती है, हमें समस्या की जड़ों को देखना पड़ेगा।”

“तो बंद क्यो नहीं कर देते उनका यहां आना”

बच्चे की आंखों में प्रशन और गहरा हो गया

“बेटे इसका एक ह्यूमन एंगल (मानविय पहलू)भी तो है। एक बंदा जो दिल्ली में आकर रिक्शा चलाता है तो कई बार अपने गांव में जो उसका लिविंग सटेंडर्ड (रहन सहन) था उससे भी कहीं ज्यादा कमा सकता है।”

कई गावो में तो स्कूल भी नहीं होते और इंडस्ट्रियल एनवायर्मेंट (औद्योगिक वातावरण) जैसे कि बिजली, सड़क और अवैलिबिलिटि ऑफ रॉ मैटीरियल (कच्चे माल की उपलब्धता) भी नहीं है।

बच्चे के चेहरे पर अब चिंता नजर आने लगी थी।

” तो गोवरंमेंट यह सब प्रोवाईड(उपलब्ध) क्यों नहीं करवाती?

क्या इतनी सिंपल (साधारण) सी बात गोवरंमेंट को समझ नहीं आती?”

कोई बताये कि मैं क्या बताऊं?

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  1. अगस्त 20, 2006 को 5:58 अपराह्न पर | #1

    सही है. बच्चों की सहज बातें हैं.इनमें से ही कुछ
    शायद यह करें भी. करीब ८ साल पहले हमारा
    छोटा बच्चा कार खरीदने के लिये कह रहा था.
    हमने पैसे का रोना रोया.बोला बैंक से निकालिये न.
    हमने कहा बैंक में नहीं हैं पैसे.तो बोला तो क्या
    फ़ायदा ऐसी बैंक का!

  2. अगस्त 20, 2006 को 10:23 अपराह्न पर | #2

    जगदीश भाई, सच कह रहे हैं…अक्सर बच्चे इतनी सहजता और आसानी से कुछ उपाय बताते हैं, जो हमारे दिमाग मे भी नही आते. मगर उनके क्रियांवयन करना जिनके हाथ मे है, उन तक कौन पहुँचाये.

  3. अगस्त 21, 2006 को 1:40 अपराह्न पर | #3

    बिलकुल सही लिखा ।
    ‘पैसे खत्म हो गये’, के जवाब में मेरी बेटी का चिंता मुक्त जवाब था , “दुकान से खरीद लाओ पैसे”
    बच्चों की सरल बुद्धि , सरल समाधान ही खोजती है । कई बार शायद यही कारगर हो ।

  4. md
    अगस्त 22, 2006 को 2:18 पूर्वाह्न पर | #4

    Hi…
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    my email.

    Thanks
    md

  5. अगस्त 25, 2006 को 2:17 अपराह्न पर | #5

    ये अच्छी रही!!

  1. जनवरी 20, 2007 को 10:21 पूर्वाह्न पर | #1

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