हो सकता है जज बन जाती

देती हजारों को मैं न्याय

बन पुलिस ऑफिसर पापा

कितनों को दिखलाती राह

डाक्टर बन देखते पापा

कितनों की बचाती जान

ओलंपिक में जा देश के

पूरे करती सब अरमां

गर बन जाती कल्पना चावला

जग में करती तुम्हारा भी नाम

पापा !!

तुम मुझे जन्म तो लेने देते !!!!!

(कल रक्षाबंधन के दिन समाचार मिला कि पटियाला के एक नर्सिंगहोम के पीछे कूंएं में 35 कन्या भ्रूण फेंक दिये गये।)



17 Responses to “तुम मुझे जन्म तो लेने देते”  

  1. सटीक कविता । यहाँ भी देखें

  2. मार्मिक कविता है. ऐसी कविताएं पढ़कर दिल पसीज उठता है. कन्याभ्रूण हत्या की घनघोर निंदा और भर्त्सना की जानी चाहिए.. जगदीश भैया को कविता के लिए धन्यवाद

  3. nicely written.

  4. मन के भाव व्यक्त करने के लिये शब्द नहीं मिल रहे।

  5. अति मार्मिक.

  6. इस तरह के समाचार पढ़ कर बहुत दु:ख होता हैं। नाइंसाफी उन के साथ जो अपने डिफ़ेन्स में कुछ नहीं कर सकते।

    जगदीश जी, कविता बहुत हृदयस्पर्शी हैं…

  7. बहुत बढिया है – इस पर कुछ लिखने के लिए मेरे पास अलफाज़ नही

  8. बदिया कविता है..मेरी एक कविता मे मेने लिखा हे
    “बेट्ए का जब जब जन्म हुआ हर घर मे खुशिया लहराइ.
    बेती का बभ्रुण परीक्श्ण कर कोख मे हत्या करवाइ.
    इतना जानो नारी से ही इस दुनिया मे रोनक आइ
    नारी जो गुम हुइ जग से तो मानो की शामत आइ”
    ashuddh lekhan ke liye kshama kare..abhi seekh rahi hu..

  9. मैने ये लेख पढा था. क़िंतु मुझे इसे पढ कर क़ोइ नयी घृणा नही हुई. किस बात से घृणा करू? 35 शव थे? न मालूम कितने रोज़ होते है! हुम संभ्रांत लोग तब कहाँ होते हैं? इस बात से कि वे पाये गये? इस में तो उस डॉक्टर दंपत्ती का दुर्भाग्य ही है! नही तो कितने रोज़ निकल जाते हैं! ये बताइये कि आप और हुम जैसे लोग रोज़ ऐसा क्य करते हैं कि हमे इस त्रासदी पर शिकायत या दुख का अधिकार हो?

  10. मैं आपके गुस्से को समझता हूं बुल्ले शाह, यह सब हमारे ही घरों महल्लों और शहरों में होता होगा, चुपचाप। मगर अपने अपने हिस्से का विरोध सब को जताना चाहिये।

  11. बहुत खूब सरजी..
    आपकी येह lines मैं और लोगों को भी पढाना चाहता हूं..

    लिखते रहें..

  12. कोख में कब्र दे दी उस नन्हे फूल को
    जब नाम बेटी का था उस से जुड़ा……
    किस से करती वोह फ़रियाद अपनी
    जब बाग़ का माली ही था उसको उजाड़ने पैर तुला

    ranju …….

    इस विशए पर और बहुत लिखने की अभी जरूरत है

    शायद तभी कुछ चेतना आ सके मेने भी इस पर लिखने की कई बार कोशिश की है

    आपका पर्यास सरहानीय है ..शुक्रिया

  13. bahut sundar

  14. 15 Amit Garg

    bahut acha likha hian dost

  15. 16 Amit Garg

    bahut acha likha hian dost..


  1. 1 DesiPundit » Archives » सर्जक या हत्यारे

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