कल फ़ादर डे पर

सुबह सुबह ऑफ़िस जाते हुए

अपने प्यारे पापा को जब मैं ग्रीटिंग कार्ड दूंगी

थैंक्यू बेटे कह कर वे मुस्कुराएंगे

मगर हल्के से जरूर झेंप जाएंगे।

दो बातें भी नहीं कर पाएंगे

ऑफ़िस को देर हो जाएगी।

शाम को काम से फ़िर देर से आएंगे।

बहुत ही अच्छे हैं मेरे पापा,

जो भी मांगो ले कर देते हैं।

मगर अक्सर कंप्यूटर पर गेम्स खेलते हुए सोचती हूं

काश कभी हम अपने पापा के साथ अंत्याक्षरी खेल पाते……



4 Responses to “अपने प्यारे पापा को”  

  1. आज इतवार को भी पापा आफिस गये हैं या अन्ताक्षरी का समय निकाल लिया?

  2. इतवार को पापा सो कर अपनी नींद पूरी करते हैं।

  3. जी संगीता जी,
    शायद इसी लिये पापा के मोहमद रफ़ी और बच्चोंके हिमेश अंकल के बीच अंत्याक्षरी जमती नहीं।

  4. वैसे आईना जी,
    आजकल अच्छे गाने हैं कहाँ अन्ताक्षरी के लिये आजकल के बच्चे तो “हिमेश” अंकल के गानों को ही याद रखते हैं जो शायद पापा लोगो को पंसद ना आयें ;-)


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